दिल्ली के जलाशयों के संरक्षण में सरकारी लापरवाही का मामला

दिल्ली में जलाशयों के संरक्षण की कोशिशें सरकारी लापरवाही और आपसी तालमेल की कमी के कारण बाधित हो गई हैं। पिछले पांच वर्षों में, जल निकायों की स्थिति में सुधार के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। राम नरेश कौशिक जैसे स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं ने जलाशयों की सुरक्षा के लिए कई पत्र लिखे और प्रयास किए, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और जल निकायों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के बारे में।
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जलाशयों के संरक्षण में बाधाएं


नई दिल्ली। दिल्ली में जलाशयों के संरक्षण की कोशिशें सरकारी विभागों की सुस्ती और आपसी तालमेल की कमी के कारण बाधित हो गई हैं। पिछले पांच वर्षों में, दिल्ली राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में संबंधित भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों को आठ बार याद दिलाया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। प्राधिकरण ने अपने रिकॉर्ड में यह स्वीकार किया है कि अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। पत्राचार और कार्रवाई में देरी के बावजूद जलाशयों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बनी हुई है।


स्वैच्छिक पहल और प्रयास

70 वर्षीय राम नरेश कौशिक, जो 2021 में दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त 27 'वेटलैंड मित्रों' में से एक हैं, ने जलाशयों की सुरक्षा के लिए स्वैच्छिक प्रयास किए। कौशिक ने राजस्व नक्शों और सरकारी पत्राचार की मदद से उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के रामपुरा और शकूरपुर में स्थित सात जल निकायों की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों को 50 से अधिक पत्र लिखे, लेकिन अब तक एक भी जल निकाय का पूरा नक्शा तैयार नहीं हो सका।


नक्शे और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का अभाव

कौशिक ने जलाशयों को बचाने के लिए केवल पत्र लिखने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नक्शे और खसरा संबंधी विवरण उपलब्ध कराए, आरटीआई के तहत आवेदन दायर किए और बैठकों में भाग लिया। इसके बावजूद जल निकायों की पहचान और सीमांकन का काम अधूरा बना हुआ है।


दिल्ली राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने कई बार संबंधित विभागों को पत्र भेजे हैं। सबसे हालिया अनुस्मारक 29 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था, जिसमें शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई थी।


नए प्रशासनिक ढांचे में समस्या का समाधान

इस वर्ष दिल्ली के जिलों का बड़ा प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ है। नए केंद्रीय उत्तर जिले के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आने के बाद, कौशिक ने नए जिलाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से मिलने का प्रयास किया। हालांकि, उन्हें बताया गया कि मामला संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट को भेज दिया गया है।


कौशिक ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया कि नए जिलाधिकारी का कार्यालय जल निकायों से केवल 10 मीटर की दूरी पर है, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।


जल निकायों के अस्तित्व पर संकट

दिल्ली में जलाशयों के संरक्षण की समस्या केवल रामपुरा और शकूरपुर तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी दिल्ली के जल निकायों की स्थिति की निगरानी कर रहा है। आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने बताया कि कई जल निकायों की पहचान उपग्रह तस्वीरों के जरिए नहीं हो पा रही है।


दिल्ली में जल निकायों का संरक्षण भूजल स्तर बनाए रखने और स्थानीय पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि जलाशयों की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया लंबित रहती है, तो उनके समाप्त होने का खतरा बढ़ सकता है।