दिल्ली के गेस्ट हाउस में आग: सुरक्षा खामियों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
दिल्ली में गेस्ट हाउस में आग की घटना
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में एक दिन पहले लगी भीषण आग की जांच में कई सुरक्षा संबंधी खामियां उजागर हुई हैं, जिसमें 21 लोगों की जान गई। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकांश पीड़ितों की मृत्यु जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने और धुएं के प्रभाव से हुई।
पुलिस ने घटना के बाद गेस्ट हाउस के सभी कमरों की तलाशी ली, जिसमें लगभग 50 से 60 मोबाइल फोन और 30 पासपोर्ट बरामद हुए। आग बुझाने के बाद भी गेस्ट हाउस के कमरे अत्यधिक गर्म थे, जो आग की तीव्रता और धुएं के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है। अब तक जांचकर्ताओं ने पांच मृतकों की पहचान कर ली है, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है.
मृतकों की पहचान और विदेशी नागरिकों की स्थिति
सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, मृतकों के शरीर पर गंभीर जलने के निशान नहीं पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि अधिकांश की मृत्यु दम घुटने और धुएं के संपर्क में आने से हुई।
गेस्ट हाउस में ठहरे अधिकांश विदेशी नागरिक मेडिकल वीजा पर भारत आए थे। हर महीने लगभग 80 विदेशी नागरिक यहां ठहरते थे। नियमों के अनुसार, विदेशी मेहमानों के लिए सी-फॉर्म भरे जाते थे और उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) में जमा किया जाता था।
सुरक्षा खामियां और बचाव कार्य
जांच के दौरान अधिकारियों ने इमारत की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां पाई हैं। इमारत की खिड़कियां और कांच के पैनल पूरी तरह से सील थे, जिससे धुएं का निकलना संभव नहीं था। तहखाने का प्रवेश द्वार भी बंद था, जिसे खोलने में लगभग 10 मिनट लगे। इस क्षेत्र से छह से सात लोगों को बचाया गया।
