दिल्ली की अदालत ने विजय गुप्ता की जमानत याचिका खारिज की
जमानत याचिका का खारिज होना
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को जम्मू से प्रकाशित एक प्रमुख समाचार पत्र के संस्थापक और संपादक विजय गुप्ता की जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुप्ता को मई में गिरफ्तार किया था, जब उन पर आरोप लगा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का एक प्रभावशाली अधिकारी बनकर लोगों से 4 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।
अदालत का निर्णय
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि विजय गुप्ता धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत आवश्यक दो शर्तों को पूरा करने में असफल रहे हैं। इन शर्तों के अनुसार, अदालत को यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोपी के खिलाफ कोई उचित आधार न हो और जमानत पर रिहा होने के बाद वह फिर से अपराध न करे। न्यायाधीश ने 18 पृष्ठों के आदेश में कहा कि गुप्ता द्वारा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना है।
गुप्ता की ठगी की तकनीक
जांच एजेंसियों के अनुसार, 'यंग बाइट्स' के संस्थापक विजय गुप्ता को 20 मई को दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया। गुप्ता ने पीएमओ में अधिकारी होने का दावा करते हुए अपने स्कूली मित्र और दुकानदारों को ठगा। उन्होंने अपनी झूठी पहचान को साबित करने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ तस्वीरें साझा कीं।
विदेश यात्रा और फर्जी पहचान
दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि गुप्ता ने 2016 से 2026 के बीच लगभग 26 विदेश यात्राएं कीं, जिनमें से कई प्रधानमंत्री के विदेश दौरे के समय की गईं। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने कहा कि गुप्ता ने फर्जी पहचान और विदेश यात्राओं का दुरुपयोग कर पीड़ितों से अवैध लाभ प्राप्त किया।
ईडी का विरोध
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि गुप्ता ने 2016 से 2026 के बीच अपने बैंक खातों में 4.06 करोड़ रुपये की नकद राशि जमा की थी, जो मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अपराध से अर्जित आय मानी गई। अदालत ने यह भी देखा कि गुप्ता ने अपने आयकर रिटर्न में इस राशि का उल्लेख नहीं किया था।
मानवीय आधार पर जमानत का खारिज होना
अदालत ने गुप्ता की उस दलील को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें उन्होंने गंभीर हृदय रोग का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जमानत मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है और वे जेल में आवश्यक दवाइयां ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में ईडी द्वारा आरोपपत्र दाखिल करना अभी बाकी है।
