दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्वाचन आयोग को दी सलाह
शिक्षा के अधिकार और निर्वाचन प्रक्रिया का संतुलन
दिल्ली उच्च न्यायालय ने छात्रों के शिक्षा के अधिकार और राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया कि वह सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की स्थिति के प्रति संवेदनशील रहे और उन पर काम का अत्यधिक बोझ न डाले।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मंगलवार को कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव संबंधी कार्यों में बाधा न डालने के लिए प्रधानाचार्यों को दिए गए निर्वाचन आयोग के आदेश की भाषा पर असंतोष व्यक्त किया।
शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव न डालने की सलाह
पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि लंबे समय तक स्कूल में काम करने वाले बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) और गणना कर्मियों के रूप में नियुक्त शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से कहा, "हम आपसे केवल यह चाहते हैं कि आप उनकी स्थिति के प्रति थोड़ा संवेदनशील रहें। हम आपके अधिकार को कम नहीं कर रहे हैं। हम उन मानवीय परिस्थितियों को समझते हैं जिनसे ये शिक्षक गुजर रहे हैं।"
निर्वाचन आयोग की स्थिति
निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि सरकारी शिक्षकों पर जरूरत से ज्यादा भार नहीं डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सहायता के लिए स्वयंसेवक उपलब्ध हैं और उन्हें जलपान भी दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि एसआईआर प्रक्रिया केवल आठ अगस्त तक निर्धारित है और नियमित विषयों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई है।
अगली सुनवाई और अदालत की अपेक्षाएं
उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की और उम्मीद जताई कि निर्वाचन आयोग तथा उसके अधिकारी शिक्षकों को चुनावी पुनरीक्षण कार्य सौंपते समय अदालत की टिप्पणियों का ध्यान रखेंगे।
अदालत ने कहा, "निर्वाचन आयोग और उसके अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्कूल के बाद के समय या गैर-शिक्षण दिनों में चुनाव संबंधी दायित्व निभाने वाले शिक्षकों की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखें।"
जनहित याचिका का विवरण
वकील राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि वे दिल्ली के सरकारी, नगर निगम और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा करना चाहते हैं।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कई स्कूलों में शिक्षण समय के दौरान नियमित शिक्षकों को हटा दिया गया है और कक्षाएं अतिथि शिक्षकों द्वारा संचालित की जा रही हैं।
