दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेईई उम्मीदवारों की याचिका खारिज की, सामुदायिक सेवा का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो जेईई उम्मीदवारों की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने जुर्माने के बजाय सामुदायिक सेवा का आदेश दिया है। एक उम्मीदवार को वृद्धाश्रम में और दूसरे को बाल देखभाल केंद्र में सेवा करने का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेईई उम्मीदवारों की याचिका खारिज की, सामुदायिक सेवा का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय

दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ दो जेईई उम्मीदवारों द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करने वाले एकल न्यायाधीश के निर्णय को बरकरार रखा है।


इन याचिकाओं में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) 2025 की उत्तर पुस्तिकाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।


मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने हालांकि, दोनों अभ्यर्थियों पर जुर्माना लगाने के आदेश में बदलाव किया और उन्हें एक महीने के लिए सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।


याचिकाकर्ताओं की अपील

दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने उन याचिकाकर्ताओं की अपील की सुनवाई की, जिन्होंने एकल पीठ के 22 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दावों को खारिज कर दिया गया था।


एकल पीठ ने राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (एनएफसीएल) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर विचार किया और प्रत्येक आवेदक पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।


सामुदायिक सेवा का आदेश

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 22 दिसंबर को पारित आदेश में एक अपीलकर्ता को 15 मई से 15 जून तक वृद्धाश्रम में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया, जो सभी दिनों में पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच होगी।


दूसरे अपीलकर्ता को गाजियाबाद के एक बाल देखभाल केंद्र में समान अवधि के लिए सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया गया है।