दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता के संकट के बीच ग्रैप-II का कार्यान्वयन

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है, जिसके चलते ग्रैप-II लागू किया गया है। इस योजना के तहत कई सख्त नियम लागू किए गए हैं, जैसे कि डीजल जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ वाहनों की अनुमति। नागरिकों से प्रदूषण कम करने में सहयोग की अपील की गई है। जानें इस योजना के विभिन्न चरणों और नियमों के बारे में विस्तार से।
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दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति


नई दिल्ली। दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दूसरे चरण को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया है। नोएडा और उसके आसपास के इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। आयोग ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नियमों और नागरिक चार्टर का पालन करें। इस दूसरे चरण के अंतर्गत प्रशासनिक एजेंसियों को कई सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बिगड़ती हवा की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।


ग्रैप की कार्यप्रणाली

ग्रैप, यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक आपातकालीन व्यवस्था है। यह प्रणाली प्रदूषण के स्तर के आधार पर नियमों को निर्धारित करती है। जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है, पाबंदियां भी कड़ी होती जाती हैं। इसे पहली बार 2017 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था। वर्तमान में, इसके कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के पास है, जो मौसम विभाग के आंकड़ों पर लगातार नजर रखता है।


ग्रैप के विभिन्न चरण

इस प्रणाली के विभिन्न चरण हवा की गुणवत्ता के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। पहला चरण तब शुरू होता है जब हवा की गुणवत्ता 'खराब' होती है, जिसमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियम और खुले में कचरा जलाने पर रोक होती है। दूसरा चरण 'बहुत खराब' हवा के लिए होता है, जिसमें डीजल जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध और पार्किंग शुल्क में वृद्धि जैसे कदम उठाए जाते हैं। तीसरा चरण 'गंभीर' स्थिति में लागू होता है, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक और पुराने वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। चौथा और अंतिम चरण 'बेहद गंभीर' स्थिति के लिए है, जिसमें ट्रकों की एंट्री पर प्रतिबंध और स्कूलों को बंद करने जैसे कड़े निर्णय लिए जाते हैं।


यातायात व्यवस्था में बदलाव

वर्तमान में लागू किए गए दूसरे चरण के दौरान यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत कुछ विशेष वाहनों को ही सड़कों पर चलने की अनुमति दी गई है, जबकि कई श्रेणियों के वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जिन वाहनों को छूट मिली है, उनमें वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाली बीएस-IV और उससे ऊपर की कारें, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहन तथा आधुनिक बसें शामिल हैं। इसके विपरीत, पुराने मानदंडों वाले वाहन और बिना वैध प्रमाणपत्र के चलने वाले कमर्शियल वाहनों पर सख्त पाबंदी रहेगी।


नागरिकों से अपील

प्रशासन और यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने वाहनों का उचित रख-रखाव करें, अनावश्यक रूप से इंजन चालू न रखें और कचरा जलाने से बचें। इसके अलावा, जितना संभव हो सके सार्वजनिक परिवहन या कारपूल का उपयोग करें और यात्रा पर निकलने से पहले यातायात सलाह और डायवर्जन की जानकारी अवश्य जांचें।