दिल की बीमारियों के प्रमुख कारण: विशेषज्ञ की सलाह

दिल की बीमारियाँ आज भी वैश्विक स्तर पर मृत्यु का एक बड़ा कारण हैं। डॉ. जेरेमी लंदन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में तीन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया है, जो दिल के दौरे और मौतों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनमें धमनियों का अवरुद्ध होना, हार्ट वॉल्व की खराबी, और धड़कन में अनियमितता शामिल हैं। जानें इन समस्याओं के बारे में और समय पर सही कदम उठाने के महत्व को समझें।
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दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा

दिल की बीमारियों के प्रमुख कारण: विशेषज्ञ की सलाह


नई दिल्ली: आज भी दिल की बीमारियाँ दुनिया भर में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनी हुई हैं। कई लोग मानते हैं कि ये समस्याएँ अचानक उत्पन्न होती हैं, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि ये धीरे-धीरे विकसित होती हैं। 25 वर्षों के अनुभव वाले प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने उन तीन मुख्य कारणों के बारे में बताया है जो दिल के दौरे और मौतों के लिए जिम्मेदार होते हैं।


धमनियों का अवरुद्ध होना

डॉ. जेरेमी इसे 'प्लंबिंग प्रॉब्लम' के रूप में वर्णित करते हैं। इसमें दिल तक रक्त पहुँचाने वाली धमनियों में धीरे-धीरे वसा, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा हो जाता है, जिससे नसें संकुचित हो जाती हैं और दिल को ऑक्सीजन और पोषण ठीक से नहीं मिल पाता। इसे मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवास्कुलर डिजीज कहा जाता है। यदि इसका उपचार नहीं किया गया, तो सीने में दर्द या हार्ट अटैक हो सकता है। डॉक्टर 'कार्डियक कैथेटराइजेशन' टेस्ट के माध्यम से इस अवरोध का पता लगाते हैं।


हार्ट वॉल्व की समस्याएँ

डॉ. जेरेमी ने बताया कि दिल के अंदर कुछ वॉल्व होते हैं जो रक्त को सही दिशा में आगे बढ़ाते हैं। कभी-कभी ये वॉल्व सख्त, संकरे या लीक होने लगते हैं। एक सामान्य समस्या 'एओर्टिक स्टेनोसिस' है, जिसमें वॉल्व कड़ा हो जाता है और ठीक से खुल नहीं पाता। इससे दिल को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। डॉक्टर इसे स्टेथस्कोप से सुनकर पहचान सकते हैं, और इसकी पुष्टि के लिए 'इको' टेस्ट किया जाता है।


धड़कन में अनियमितता

डॉक्टर ने बताया कि दिल एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम से संचालित होता है, जो इसकी धड़कन की गति को नियंत्रित करता है। जब इस सिस्टम में कोई समस्या आती है, तो दिल बहुत तेज, बहुत धीमे या अनियमित रूप से धड़कने लगता है। इसे 'एट्रियल फिब्रिलेशन' कहा जाता है, जिसमें दिल के ऊपरी हिस्से में अजीब सी फड़फड़ाहट होती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए डॉक्टर ईसीजी या हार्ट मॉनिटर का उपयोग करते हैं।


समय पर सही कदम उठाना

डॉ. जेरेमी लंदन का कहना है कि इन समस्याओं को समझकर लोग डरने के बजाय समय पर उचित कदम उठा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी कभी भी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हो सकती। इसलिए, किसी भी लक्षण के प्रकट होने पर सीधे डॉक्टर से संपर्क करना सबसे अच्छा विकल्प है।