दिग्विजय सिंह का 79वां जन्मदिन: जानें उनके जीवन की खास बातें

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज 28 फरवरी को अपने 79वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1969 में हुई थी, और उन्होंने दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। दिग्विजय सिंह को 'दिग्गी राजा' के नाम से भी जाना जाता है। इस लेख में उनके जीवन की कुछ रोचक बातें और उनके कार्यकाल के दौरान किए गए महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में जानें।
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दिग्विजय सिंह का 79वां जन्मदिन: जानें उनके जीवन की खास बातें

जन्मदिन की शुभकामनाएं

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज 28 फरवरी को अपने 79वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उन्हें उनके मिलनसार स्वभाव के लिए जाना जाता है। दिग्विजय सिंह ने 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके विरोधी भी उनकी विनम्रता की सराहना करते हैं। वह कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वियों के प्रति आक्रामक नहीं होते, लेकिन बिना किसी दबाव के अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखते हैं। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

दिग्विजय सिंह का जन्म 28 फरवरी 1947 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ। वह राघौगढ़ रियासत के राजघराने से संबंधित हैं और राजनीति उनके लिए एक विरासत है। उनके पिता बलभद्र सिंह भी विधायक रह चुके हैं।


राजनीतिक करियर

1969 में, केवल 22 वर्ष की आयु में, दिग्विजय सिंह ने राघौगढ़ नगर पालिका का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने 54 वर्षों के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव का सामना किया।


मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल

दिग्विजय सिंह दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 1993 से 2003 तक अपने कार्यकाल में, उन्होंने ग्रामीण विकास, गरीबों के सशक्तिकरण और शिक्षा में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कीं। उन्होंने शिक्षा गारंटी योजना के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा तक सभी की पहुंच सुनिश्चित की। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कई कार्यक्रमों की शुरुआत की।


दिग्गी राजा की उपाधि

महाराष्ट्र की राजनीति में दिग्विजय सिंह का प्रभाव आज भी बना हुआ है। वह अक्सर राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बने रहते हैं। 1984 में, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने युवा कांग्रेसियों को अपने कोर ग्रुप में शामिल किया, तब दिग्विजय सिंह लोकसभा सांसद थे। एक डिनर पार्टी के दौरान, एक पत्रकार ने उनका नाम सही से नहीं लिया, जिसके कारण उन्हें 'दिग्गी राजा' के नाम से जाना जाने लगा।