दक्षिण भारत में मानसून की शुरुआत में देरी, मौसम पूर्वानुमान में बदलाव
दक्षिण भारत में मानसून की स्थिति
भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम मौसम मॉडल के अनुसार, दक्षिण भारत में मानसून के लिए आवश्यक ऊपरी स्तर की तेज हवाएँ 5-6 जून के बाद ही सक्रिय होने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है, और इसका प्रभाव धीरे-धीरे विकसित होगा। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मौसम प्रणाली है, जो हिंद महासागर से गर्म और नमी से भरी हवाएँ लाकर जून से सितंबर के बीच देश में अधिकांश वर्षा का कारण बनती है। यह कृषि को समर्थन देती है, जलाशयों को भरती है और लोगों को गर्मी से राहत प्रदान करती है।
मौसम पूर्वानुमान प्रणाली
भारतीय मौसम विज्ञान एवं चिकित्सा विभाग द्वारा उपयोग की जाने वाली वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली (जीएफएस) एक अत्याधुनिक कंप्यूटर मॉडल है। यह मॉडल कई दिनों पहले मौसम के पैटर्न का पूर्वानुमान लगाने के लिए विशाल मात्रा में वायुमंडलीय डेटा का विश्लेषण करता है। हालिया पूर्वानुमानों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ प्रणाली को दक्षिणी भारत में ऊपरी स्तर की पूर्वी हवाओं के मजबूत होने से पहले ही आगे बढ़ना होगा। इस स्थिति में, केरल में मानसून की प्रारंभिक धारा कमजोर रहने की संभावना है।
मानसून की अनिश्चितता
इस वर्ष मानसून की स्थिति अनिश्चित रही है, जिसके कारण आईएमडी का पूर्वानुमान कई बार गलत साबित हुआ है। पहले, आईएमडी ने केरल में मानसून के आगमन की तारीख 26 मई निर्धारित की थी, लेकिन अब यह अनुमान 2-4 जून के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। कुछ क्षेत्रों में मानसून से पहले की बारिश हो चुकी है, लेकिन मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए आवश्यक सभी परिस्थितियाँ अभी भी बन रही हैं।
मानसून की घोषणा के लिए आवश्यक शर्तें
आईएमडी द्वारा मानसून की घोषणा के लिए तीन प्रमुख शर्तें पूरी होनी चाहिए। इनमें केरल के कम से कम 60% मौसम स्टेशनों पर लगातार वर्षा, अरब सागर पर पश्चिमी हवाओं की निश्चित गति और पर्याप्त बादल छाए रहना शामिल हैं। वर्तमान में बारिश और बादलों का आवरण तो पर्याप्त है, लेकिन केरल में पश्चिमी हवाएँ कमजोर पड़ रही हैं। यह कमजोरी बंगाल की खाड़ी में हुई चक्रवाती गतिविधियों के कारण है, जिससे मानसूनी हवाओं का प्रवाह प्रभावित हुआ है।
