दक्षिण चीन सागर में चीन की नई साजिश: विस्तारवादी नीति का खुलासा
चीन की विस्तारवादी नीति का खुलासा
आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों और समुद्र में चलती मिसाइलों की तस्वीरें चीन की पड़ोसी देशों के प्रति दहशत फैलाने की रणनीति को दर्शाती हैं। ड्रैगन ने अपने पड़ोसियों को डराने और युद्ध का माहौल बनाए रखने का एक नया तरीका अपनाया है। जब दुनिया सो रही होती है, तब चीन समुद्र में नई साजिशें रचता है। कभी ताइवान के आसपास लाइव फायर ड्रिल करना, तो कभी वियतनाम और फिलीपींस की सीमाओं में घुसपैठ करना। चीन का उद्देश्य स्पष्ट है: इतना डर पैदा करना कि विरोधी बिना लड़े ही हार मान ले। हाल ही में, दक्षिण चीन सागर में चीन की एक और बड़ी चोरी का पर्दाफाश हुआ है। सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों में चीन की एक नई करतूत सामने आई है।
चीन की नई चाल का खुलासा
अमेरिका के मरीन मॉनिटरिंग ग्रुप ने स्कारबोरो शोल की हालिया तस्वीरें जारी की हैं, जो चीन की विस्तारवादी नीति को एक बार फिर उजागर करती हैं। 27, 29 और 30 मई की तस्वीरों में स्कारबोरो शोल के मुहाने पर एक चमकीला तैरता हुआ बैरियर देखा जा सकता है। यह कोई ऑप्टिकल भ्रम नहीं है, बल्कि चीन द्वारा स्थापित एक ठोस ढांचा है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों के रास्ते को रोकना है। चीन ने 2012 से इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है। जब तस्वीरें सामने आईं, तो चीन ने 1 जून को इसे वहां से हटा दिया। फिलीपींस और अमेरिका अब इस नई चाल को लेकर सतर्क हैं।
दक्षिण चीन सागर का महत्व
दक्षिण चीन सागर में चीन की गुंडागर्दी का मुख्य कारण इस क्षेत्र का सामरिक महत्व है। लगभग 33% वैश्विक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे हर साल करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार होता है। इसके अलावा, इस समुद्र के नीचे अरबों बैरल तेल और ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार है, जिस पर चीन का एकाधिकार चाह रहा है। इस क्षेत्र से 10% मछलियों की आपूर्ति होती है, जो चीन की खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है। चीन का लक्ष्य अमेरिकी नौसेना को एशिया प्रशांत क्षेत्र में सीधी चुनौती देना है।
ताइवान पर प्रभाव
दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति और अस्थायी ढांचों के माध्यम से, चीन ताइवान की समुद्री घेराबंदी की तैयारी कर रहा है। यदि चीन इस क्षेत्र पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, तो ताइवान की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो जाएगी। ताइवान को बाहरी सहायता और हथियार मिलना बंद हो जाएगा, जिससे चीन के लिए ताइवान पर हमला करना आसान हो जाएगा।
