तेलंगाना में पत्रकारों की गिरफ्तारी पर विवाद, आईएएस अधिकारी के खिलाफ मानहानि का मामला
तेलंगाना में पत्रकारों की गिरफ्तारी
हैदराबाद में एक महिला आईएएस अधिकारी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में एक तेलुगु समाचार चैनल के दो पत्रकारों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस मामले की जानकारी दी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन पत्रकारों को आईएएस अधिकारी को लक्षित करते हुए 'अत्यंत अनुचित और निंदनीय' सामग्री प्रसारित करने के आरोप में पकड़ा गया।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस गिरफ्तारी को लेकर तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया और पत्रकारों की शीघ्र रिहाई की मांग की।
तेलंगाना के आईएएस अधिकारी संघ की शिकायत के बाद कुछ समाचार चैनलों और अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन मीडिया संस्थानों ने एक महिला आईएएस अधिकारी के बारे में झूठी और निराधार सामग्री प्रकाशित की।
पुलिस ने बताया कि पहले दिन में चैनल के तीन पत्रकारों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, जिनमें से बाद में दो को गिरफ्तार किया गया जबकि एक को छोड़ दिया गया।
गिरफ्तार पत्रकारों में से एक ने मीडिया से कहा कि 'यह एक अवैध गिरफ्तारी है और हम अदालत का रुख करेंगे'। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले की गहन जांच के लिए 12 जनवरी को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी सी सज्जनार ने पत्रकारों से कहा कि जिन लोगों को तलब किया गया है, उन्हें पुलिस के साथ सहयोग करना चाहिए।
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पत्रकारों की 'अवैध' गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और उनकी रिहाई की मांग की।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस का शासन आपातकाल के दिनों की याद दिलाता है। उन्होंने गिरफ्तार पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग की।
बीआरएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने भी पत्रकारों की हिरासत की निंदा की और उनकी रिहाई की मांग की। भाजपा के राज्य अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने पुलिस कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
