तेलंगाना में कानून व्यवस्था पर केटीआर की चिंता, अमित शाह को लिखा पत्र

भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तेलंगाना में बिगड़ती कानून व्यवस्था और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़ी बेनामी कंपनी के ठेकों पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है और पुलिस पर जनता का विश्वास कम हो गया है। केटीआर ने ठेकों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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तेलंगाना में कानून व्यवस्था पर केटीआर की चिंता, अमित शाह को लिखा पत्र

केटीआर का पत्र और चिंता

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव, जिन्हें केटीआर के नाम से जाना जाता है, ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने तेलंगाना में बिगड़ती कानून व्यवस्था और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़ी एक बेनामी कंपनी, केएलएसआर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, को सरकारी ठेकों के संदिग्ध आवंटन पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।


केटीआर ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर केएलएसआर इंफ्राटेक से संबंधित मामलों की जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ की। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि सरकारी अधिकारियों ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मामले में महत्वपूर्ण सबूत गायब हो गए हैं।


कानून व्यवस्था की स्थिति

केटीआर ने कहा कि यह घटना राज्य में कानून व्यवस्था की गंभीर गिरावट और जांच एजेंसियों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी बेनामी कंपनी को बचाने के लिए अधिकारियों पर सबूत नष्ट करने का दबाव डाला।


उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि पुलिस और जांच एजेंसियों पर जनता का विश्वास बुरी तरह से कम हो गया है। केटीआर ने यह भी बताया कि कंपनी के दिवालियापन की कार्यवाही चल रही होने के बावजूद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केएलएसआर इंफ्राटेक को बड़े सरकारी ठेके दिए हैं।


ठेकों का आवंटन

रिपोर्टों के अनुसार, दिवालियापन की कार्यवाही के बावजूद कंपनी को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के ठेके आवंटित किए गए हैं। इनमें सिंचाई परियोजनाएं, पेयजल आपूर्ति परियोजनाएं, यंग इंडिया इंटीग्रेटेड स्कूल परियोजनाएं और प्रमुख सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं।


केटीआर ने कहा कि ऐसे निर्णय सरकारी खरीद मानदंडों के अनुपालन, वित्तीय पात्रता और निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हैं।