तृणमूल कांग्रेस को मिला बड़ा झटका: सुखेन्दु शेखर राय ने दिया इस्तीफा
सुखेन्दु शेखर राय का इस्तीफा
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस को एक महत्वपूर्ण झटका लगा, जब राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य सुखेन्दु शेखर राय ने उच्च सदन से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। यह घटना उस समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में विधायकों के एक बड़े समूह के विद्रोह के कारण पार्टी गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। राय का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर जब उन्होंने हाल ही में चेतावनी दी थी कि विधानसभा में चल रही अशांति संसद तक फैल सकती है।
विधायकों का विद्रोह
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से लगभग 60 ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित किया। इस कदम ने पार्टी को एक बड़ा झटका दिया और सांसदों के बीच विद्रोह की आशंका को जन्म दिया। राय ने सार्वजनिक रूप से इस संभावना को व्यक्त किया और कहा कि विधानसभा में जो घटनाक्रम हुआ है, वह अंततः संसद में भी दोहराया जा सकता है।
आरजी कार मामले पर राय का रुख
अपने इस्तीफे के बाद, राय ने आरजी कार मामले का उल्लेख किया और इस मुद्दे पर अपने विचारों को दोहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस आयुक्त और आरजी कार मामले के प्रमुख से हिरासत में पूछताछ की मांग की थी। उनका मानना है कि सबूतों से छेड़छाड़ में उनकी मुख्य भूमिका थी। आरजी कार आंदोलन के दौरान पार्टी के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हो गए थे, लेकिन मतभेदों के बावजूद, राय प्रमुख मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व के साथ खड़े रहे।
सुखेन्दु शेखर राय का राजनीतिक सफर
सुखेन्दु शेखर राय पहली बार 2011 में राज्यसभा के सदस्य बने। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें लगातार तीन बार उच्च सदन के लिए मनोनीत किया। वे वर्षों से पार्टी के वरिष्ठ संसदीय चेहरों में से एक रहे हैं। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान, जब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा, तो राय को भी वहीं भेजा गया था। हालांकि, आरोप लगे कि पार्टी नेताओं ने उनके विचारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
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