तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में अवामी लीग पर प्रतिबंध का विरोध किया
तसलीमा नसरीन का बयान
कोलकाता में, निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश की अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध करते हुए इसे "लोकतंत्र के खिलाफ एक कदम" करार दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, तसलीमा ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की देश वापसी को लेकर भी चिंता व्यक्त की। हसीना (78) ने अगस्त 2024 में बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद ढाका से भारत में शरण ली थी।
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
तसलीमा (63) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे कथित अत्याचारों पर चिंता जताई और जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा, "किसी भी राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर करना गंभीर सवाल उठाता है।"
अवामी लीग पर प्रतिबंध का विरोध
तसलीमा ने कहा कि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाना गलत था और इसे लोकतंत्र के खिलाफ उठाया गया कदम बताया। उन्होंने इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की अपील की। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 2025 में आतंकवाद-रोधी कानून के तहत अवामी लीग पर यह प्रतिबंध लगाया था।
हसीना की वापसी की अनिश्चितता
तसलीमा ने आरोप लगाया कि हसीना के देश छोड़ने के बाद अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, "अवामी लीग के कई कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। शेख हसीना वापस लौटना चाहती हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि यह संभव होगा या नहीं।"
बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरपंथ
लेखिका ने 1994 में अपने विचारों के कारण कट्टरपंथियों से जान से मारने की धमकियों के चलते बांग्लादेश छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने देश लौटने की उम्मीद कम है, लेकिन उनका भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है। तसलीमा ने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि यह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को दर्शाता है।
महिलाओं के अधिकारों की कमी
तसलीमा ने कहा, "बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरपंथी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं। महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति में समान अधिकार नहीं मिल रहे हैं।" उन्होंने हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की भी निंदा की और कहा कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही।
राजनीतिक स्थिति की आलोचना
तसलीमा ने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "अब जमात-ए-इस्लामी विपक्षी पार्टी है, जो महिलाओं की समानता के खिलाफ है और शरीयत कानून लागू करना चाहती है।"
छात्र आंदोलन की विफलता
बांग्लादेश में राजनीतिक अनिश्चितता के संदर्भ में, तसलीमा ने कहा कि हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने छात्र आंदोलन की विफलता पर भी सवाल उठाए और कहा कि जिहादियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है।
मदरसों की भूमिका
तसलीमा ने मदरसों के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ मदरसे जिहादी तैयार कर रहे हैं और वहां बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
