तमिलनाडु सरकार ने रेवेन्यू सर्टिफिकेट के लिए नया 3-स्टेप अप्रूवल सिस्टम लागू किया
चेन्नई में नई पहल
तमिलनाडु की सरकार ने आम जनता को राहत पहुंचाने और सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य ने रेवेन्यू सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक नया 3-स्टेप अप्रूवल सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है।
इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना और नागरिकों को समय पर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले की प्रक्रिया में कई स्तरों पर फाइलें लंबित रहने के कारण नागरिकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। नई प्रणाली के लागू होने के बाद, आवेदन तीन निर्धारित चरणों से गुजरेगा, जिससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी।
नए सिस्टम की विशेषताएँ
3-स्टेप अप्रूवल सिस्टम के तहत, आवेदन की प्रारंभिक जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और अंतिम स्वीकृति निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएगी। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी।
सरकार ने यह भी बताया है कि नई व्यवस्था में डिजिटल ट्रैकिंग की सुविधा होगी, जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम हो जाएगी।
लाभार्थियों की संख्या
रेवेन्यू सर्टिफिकेट का उपयोग आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, शैक्षणिक प्रवेश और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है। इस नई व्यवस्था से हर साल लाखों आवेदकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने से सरकारी सेवाओं पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
ई-गवर्नेंस को बढ़ावा
तमिलनाडु सरकार लंबे समय से प्रशासनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दे रही है। 3-स्टेप अप्रूवल सिस्टम को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही
सरकार का कहना है कि नई प्रक्रिया में प्रत्येक स्तर पर अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी। इससे लंबित मामलों की संख्या कम होगी और नागरिकों को निर्धारित समय के भीतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। यदि किसी आवेदन में देरी होती है, तो उसका कारण भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भविष्य में अन्य सरकारी प्रमाणपत्रों और सेवाओं के लिए भी इसी तरह की सरल और डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
