तमिलनाडु सरकार को गंभीर अपराधों के खिलाफ चुनौती का सामना
राजनीतिक संकट का सामना
सत्ता में आने के कुछ ही हफ्तों बाद, विजय के नेतृत्व वाली सरकार को अपनी पहली बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मदुरै के मीनाक्षी मंदिर के पास 17 वर्षीय लड़के की हत्या और कोयंबटूर में 10 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार और हत्या जैसे दो गंभीर अपराधों ने तमिलनाडु में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। इन घटनाओं ने विपक्ष को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर नए प्रशासन को घेरने का एक अवसर प्रदान किया है।
विपक्ष की तीखी आलोचना
कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कज़गम सरकार पर तीखे हमले किए हैं, यह सवाल उठाते हुए कि क्या सरकार अपनी भारी चुनावी जीत के बाद शासन की वास्तविकताओं के लिए तैयार थी। के. अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के बाद के जश्न में उलझी रही, जबकि राज्य में गंभीर अपराध होते रहे। उन्होंने हाल की दो घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधी बेखौफ होकर अपराध कर रहे हैं और सरकार ने त्वरित कार्रवाई करने में विफलता दिखाई है।
महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
भाजपा नेता ने हाल के अपराधों को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा और कहा कि सरकार बदलने के बावजूद तमिलनाडु में असुरक्षित माहौल बना हुआ है। यह आलोचना केवल भाजपा तक सीमित नहीं रही। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी विजय पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया कि क्या नई सरकार के तहत राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी पूछा कि क्या तमिलनाडु उत्तर प्रदेश जैसा होता जा रहा है, जो अक्सर दक्षिणी राजनीतिक चर्चाओं में कानून-व्यवस्था की आलोचना के लिए उपयोग किया जाता है।
मंत्री की असंवेदनशीलता पर सवाल
उदयनिधि ने विजय पर चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के बड़े वादे करने के बाद चुप रहने का आरोप लगाया। कोयंबटूर बलात्कार और हत्या मामले पर पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर तमिलनाडु की उद्योग मंत्री कीर्तना ने जवाब देने से इनकार कर दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। आलोचकों, विशेष रूप से भाजपा नेताओं ने उनके असंवेदनशील व्यवहार की आलोचना की।
