तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: विजय की पार्टी का उभार और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़
वर्ष 2026 का विधानसभा चुनाव तमिलनाडु की राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे रहा है। द्रविड़ दलों के लंबे समय से चल रहे वर्चस्व के बीच, अभिनेता विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कषगम, ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलने का प्रयास किया है। विभिन्न एक्जिट पोल के परिणामों ने इस नए दल के प्रति उत्साह और अनिश्चितता दोनों को बढ़ा दिया है।
सर्वेक्षणों के अनुसार संभावित सीटें
एक प्रमुख सर्वेक्षण के अनुसार, विजय की पार्टी अपने पहले चुनाव में 98 से 120 सीटें जीतने की संभावना रखती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। सर्वे में यह भी बताया गया है कि द्रमुक गठबंधन को 92 से 110 सीटें मिल सकती हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन 22 से 32 सीटों तक सीमित रह सकता है। अन्नाद्रमुक गठबंधन का मत प्रतिशत लगभग 23 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि विजय की पार्टी को लगभग 35 प्रतिशत मत मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में विजय
मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद के सवाल पर विजय सबसे आगे नजर आ रहे हैं। लगभग 37 प्रतिशत मतदाताओं ने उन्हें अपनी पहली पसंद बताया, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को 35 प्रतिशत समर्थन मिला। यह अंतर भले ही छोटा हो, लेकिन यह दर्शाता है कि जनता में बदलाव की इच्छा तेजी से बढ़ रही है।
युवाओं में विजय की लोकप्रियता
युवाओं के बीच विजय की लोकप्रियता विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सर्वेक्षण के अनुसार, 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं में लगभग 68 प्रतिशत ने उनका समर्थन किया, जबकि 20 से 29 वर्ष के समूह में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत और 30 से 39 वर्ष के वर्ग में 45 प्रतिशत रहा। यह स्पष्ट करता है कि युवा वर्ग पारंपरिक राजनीति से हटकर नए विकल्प की ओर बढ़ रहा है।
विभिन्न सर्वेक्षणों के परिणाम
हालांकि, सभी सर्वेक्षण एक समान परिणाम नहीं दिखाते। कुछ एजेंसियों ने विजय की पार्टी को 10 से 26 सीटों के बीच सीमित रहने का अनुमान जताया है। इन अनुमानों के अनुसार, द्रमुक गठबंधन को 120 से 145 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्नाद्रमुक को 60 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है। कुछ सर्वेक्षणों में मुकाबला कड़ा बताया गया है, जबकि एक एजेंसी ने अन्नाद्रमुक को बढ़त में दिखाया है।
राजनीति में फिल्म सितारों की परंपरा
तमिलनाडु में फिल्म सितारों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं है। पहले एमजी रामचंद्रन और बाद में जे जयललिता ने भी इसी रास्ते पर चलकर सत्ता हासिल की थी। यदि विजय सत्ता में आते हैं, तो वह इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले तीसरे बड़े अभिनेता नेता बन सकते हैं। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि विजय ने किसी बड़े गठबंधन के साथ जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
मतदान और जनता की सक्रियता
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल को हुआ, जिसमें 84 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। एक्जिट पोल के अनुसार, लगभग 35 प्रतिशत मतदाताओं ने बदलाव की इच्छा को अपनी प्राथमिक वजह बताया, जबकि विजय के समर्थकों में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि जनता का एक बड़ा वर्ग मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक विजय की तुलना आंध्र प्रदेश के नेता एनटी रामाराव से कर रहे हैं, जिन्होंने बिना किसी स्थापित दल के समर्थन के राजनीति में प्रवेश कर बड़ी जीत हासिल की थी। विजय की लोकप्रियता और युवा समर्थन उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो विजय किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
इस बार का चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। सभी की नजर 4 मई पर टिकी है, जब मतगणना होगी। एक्जिट पोल केवल अनुमान होते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
