तमिलनाडु में स्कूल प्रशासनिक अधिकारी और प्रधानाध्यापिका को मिली चार साल की सजा

तमिलनाडु के रानीपेट में एक अदालत ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी और प्रधानाध्यापिका को 187 फर्जी छात्रों के नाम दर्ज करने के मामले में चार साल की कठोर सजा सुनाई है। यह मामला 2012 में सामने आया था, जब अधिकारियों ने स्कूल में छात्रों की संख्या में हेराफेरी का पता लगाया। अदालत ने दोनों को आपराधिक कदाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दोषी पाया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
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रानीपेट में अदालत का फैसला

रानीपेट (तमिलनाडु), 28 जुलाई: तमिलनाडु के रानीपेट स्थित एक अदालत ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी और प्रधानाध्यापिका को रिकॉर्ड में हेराफेरी कर 187 'फर्जी' छात्रों के नाम दर्ज करने के मामले में चार साल की कठोर सजा सुनाई है। सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में वित्व रत्ना विला सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी करुणागरा संजीव दॉस और प्रधानाध्यापिका ऐलिस ताबिता विजय कुमारी शामिल हैं। अदालत ने दोनों पर क्रमशः 35,000 रुपये और 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।


धन की हेराफेरी का मामला

यह मामला 27 अगस्त 2012 को तब उजागर हुआ जब डीवीएसी, वेल्लोर डिटैचमेंट और निरीक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया। जांच में यह सामने आया कि स्कूल में वास्तविक छात्रों की संख्या काफी कम थी, जबकि आधिकारिक रजिस्टरों में छात्रों की संख्या बढ़ाकर 259 दर्शाई गई थी। रजिस्टर में 187 फर्जी छात्रों के नाम जोड़कर दोनों आरोपियों ने अवैध रूप से छह अतिरिक्त शिक्षण पदों की मंजूरी प्राप्त की।


सरकारी खजाने को हुआ नुकसान

इन दोनों ने गलत तरीके से सरकारी लाभ प्राप्त किए, जिसमें फर्जी कर्मचारियों के वेतन के लिए 4,67,121 रुपये और मध्याह्न भोजन योजना के लिए 2,762 रुपये शामिल थे। इस प्रकार सरकारी खजाने को कुल 4.69 लाख रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ। डीवीएसी ने विस्तृत जांच के बाद रानीपेट की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।


अदालत का निर्णय

अदालत ने 27 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को आपराधिक कदाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दोषी पाया। इसके साथ ही, सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दोनों को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।