तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की पार्टी को बहुमत की चुनौती
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्रि कषगम, सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर है। राज्यपाल ने विजय से सरकार गठन के लिए आवश्यक विधायकों की संख्या की पुष्टि करने को कहा है। कांग्रेस ने द्रमुक से दूरी बनाते हुए विजय का समर्थन किया है, जबकि द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित समझौते की चर्चा हो रही है। राजनीतिक तनाव के बीच, कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे? जानें पूरी कहानी।
| May 7, 2026, 18:53 IST
तमिलनाडु में सरकार गठन की स्थिति
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्रि कषगम, सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पष्ट किया है कि विजय को सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए पर्याप्त विधायकों की सूची और बहुमत का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
राज्यपाल और विजय के बीच बैठक
आज चेन्नई में विजय और राज्यपाल के बीच लगातार दूसरे दिन बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने विजय से पूछा कि उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या कैसे पूरी होगी और कौन से विधायक उनके समर्थन में हैं। राज्यपाल ने यह भी संकेत दिया कि तमिलनाडु में स्थिर सरकार उनकी प्राथमिकता है और केवल दावा करने से सरकार नहीं बनाई जा सकती। तमिलगा वेत्रि कषगम ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, और कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से यह संख्या 113 तक पहुंचती है। हालांकि, विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट खाली करनी होगी, जिससे सदन की प्रभावी संख्या 233 रह जाएगी और बहुमत का आंकड़ा 117 होगा। ऐसे में विजय खेमे को सरकार बनाने के लिए पांच और विधायकों की आवश्यकता होगी।
कांग्रेस का समर्थन और द्रमुक से दूरी
बदलते राजनीतिक परिदृश्य में, कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी द्रमुक से दूरी बनाते हुए विजय की पार्टी को समर्थन देने का निर्णय लिया है। कांग्रेस का कहना है कि उनका समर्थन धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है और वे किसी भी सांप्रदायिक ताकत को गठबंधन में शामिल नहीं देखना चाहते। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि राजनीति में गठबंधन बदलना विश्वासघात नहीं है।
विजय की पार्टी की रणनीति
विजय ने भारतीय जनता पार्टी से समर्थन लेने में रुचि नहीं दिखाई है। राज्यपाल से मुलाकात के बाद, उन्होंने अपने आवास पर वरिष्ठ नेताओं और कानूनी सलाहकारों के साथ बैठक की। पार्टी के भीतर यह राय उभरकर सामने आई है कि यदि सरकार गठन में अड़चन आती है, तो उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। कुछ नेताओं ने दोबारा चुनाव की संभावना पर भी चर्चा की है, यह मानते हुए कि सहानुभूति विजय के साथ है और यदि चुनाव जल्दी होते हैं, तो विजय स्पष्ट बहुमत से अधिक सीटें हासिल कर सकते हैं।
द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित समझौता
तमिलनाडु की राजनीति में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित समझौते की चर्चा है। चुनाव में एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे दोनों दल अब विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए साथ आने की संभावना तलाश रहे हैं। द्रमुक के पास 59 और अन्नाद्रमुक के पास 47 विधायक हैं, जिनकी संयुक्त संख्या 106 होती है। यदि विजय बहुमत साबित करने में असफल रहते हैं, तो अन्नाद्रमुक नेता ई पलानीस्वामी के नेतृत्व में सरकार बनाने का प्रयास किया जा सकता है, जिसमें द्रमुक बाहर से समर्थन दे सकती है।
अन्नाद्रमुक की रणनीति
इस बीच, अन्नाद्रमुक ने अपने कई विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसोर्ट में भेज दिया है। पार्टी प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की, लेकिन संख्या और कारण बताने से इंकार कर दिया। राजनीतिक जानकार इसे संभावित टूटफूट रोकने और आगे की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। विजय की पार्टी अब विदुथलाई चिरुथैगल कषगम, वाम दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है, हालांकि इन दलों ने अभी खुलकर कोई निर्णय नहीं लिया है। विदुथलाई चिरुथैगल कषगम प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने कहा कि पार्टी वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद फैसला करेगी।
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
राजनीतिक तनाव के बीच, तमिलनाडु कांग्रेस समिति ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल और केंद्र सरकार संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं और सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने से रोका जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बहुमत की परीक्षा विधानसभा के पटल पर होनी चाहिए, न कि राजभवन में। विजय समर्थकों के बीच भी बेचैनी बढ़ रही है। पार्टी को उम्मीद थी कि पहले शपथ ग्रहण होगा और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित किया जाएगा, लेकिन राज्यपाल के रुख ने स्थिति बदल दी है। अब पूरा ध्यान संख्या जुटाने पर है। चेन्नई की राजनीतिक गलियों में फिलहाल यही चर्चा है कि क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे या फिर तमिलनाडु में एक अप्रत्याशित राजनीतिक गठबंधन सत्ता संभालेगा।
