तमिलनाडु में कपास और सूत की कीमतों में वृद्धि पर मुख्यमंत्री की चिंता

तमिलनाडु में कपास और सूत की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे राज्य के वस्त्र उद्योग पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने बताया कि कपास की कीमतें पिछले कुछ महीनों में 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे उद्योग की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कपास के आयात पर शुल्क को समाप्त करने की अपील की है ताकि उद्योग को राहत मिल सके। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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तमिलनाडु में कपास और सूत की कीमतों में वृद्धि पर मुख्यमंत्री की चिंता gyanhigyan

कपास और सूत की कीमतों में वृद्धि

तमिलनाडु में कपास और सूत की कीमतों में निरंतर वृद्धि से चिंताएं बढ़ रही हैं। राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने इस विषय पर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि कपास की कमी और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण वस्त्र उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।


वस्त्र उद्योग का महत्व

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा वस्त्र और परिधान निर्यातक राज्य है। यहां लाखों लोग इस उद्योग से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की महिलाओं की है, जिनकी आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर करती है।


कपास की कीमतों में वृद्धि

हाल के महीनों में कपास की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्तमान में, कपास की कीमत दो महीने पहले 54,700 रुपये प्रति कैंडी थी, जो अब बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है। यह लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।


सूत की कीमतों में वृद्धि

सूत की कीमत भी 301 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन लागत में काफी वृद्धि हुई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों पर अधिक दबाव पड़ रहा है।


भारत का वस्त्र उद्योग

भारत का वस्त्र उद्योग वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और तमिलनाडु इस क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है। राज्य के कई शहर जैसे तिरुपुर, कोयंबटूर और इरोड वस्त्र उत्पादन और निर्यात के लिए प्रसिद्ध हैं।


कपास का आयात आवश्यक

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि वर्तमान स्थिति में उद्योग को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए कपास का आयात आवश्यक हो गया है। हालांकि, कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क होने के कारण उद्योग को राहत नहीं मिल पा रही है।


केंद्र सरकार से मांग

उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि कपास पर लगने वाले आयात शुल्क को तुरंत समाप्त किया जाए, ताकि उद्योग को सस्ती दरों पर कच्चा माल मिल सके। उनका कहना है कि इससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी और भारतीय वस्त्र उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना रहेगा।


रोजगार का महत्व

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र के बाद वस्त्र और परिधान उद्योग तमिलनाडु में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। इसलिए, सरकार की जिम्मेदारी है कि लाखों लोगों की नौकरियों और पूरे वस्त्र उद्योग श्रृंखला की स्थिरता को सुरक्षित रखा जाए।


उद्योग संगठनों की चिंता

उद्योग संगठनों ने भी कपास की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की है और केंद्र सरकार से जल्द राहत देने की मांग की है।