तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा: एक राजनीतिक चुनौती का सामना
विजय का करूर दौरा: एक संवेदनशील वापसी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर करूर जिले में एक साल के कठिन दौर से गुजरा है। इस जिले में, जहां विजय के चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ी त्रासदी हुई थी, शुक्रवार को उनका स्वागत किया गया। इस बार वे विपक्षी नेता के रूप में नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के रूप में लौटे हैं। वे उस दुखद घटना के बाद पीड़ित परिवारों से किए गए वादे को पूरा करने के लिए आए हैं। सितंबर 2025 में 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) की रैली में भगदड़ के कारण 41 लोगों की जान गई और 110 लोग घायल हुए। यह घटना किसी भी राजनीतिक अभियान को समाप्त करने के लिए काफी थी, खासकर जब कोई नया नेता मैदान में हो।
विजय की संवेदनशीलता और प्रशासनिक दौरा
विजय ने इस कठिन परिस्थिति को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाला। इस हादसे में कई कीमती जानें गईं और विजय को इसके लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। पीड़ित परिवारों को सहानुभूति और सांत्वना की आवश्यकता थी, इसलिए विजय का करूर दौरा महत्वपूर्ण है। यह केवल एक प्रशासनिक दौरा नहीं है, बल्कि उस स्थान पर वापसी है जहां से TVK की तैयारियों की आलोचना हुई थी। विजय अब पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने और जिले में बड़े निवेश परियोजनाओं की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं।
करूर रैली में भगदड़ का कारण
यह दुखद घटना 21 सितंबर, 2025 को हुई, जब करूर में विजय की चुनावी रैली के लिए भारी भीड़ जुटी थी। TVK के अधिकारियों ने अनुमान लगाया था कि लगभग 15,000 लोग आएंगे, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक थी। नमकक्कल जिले से 5,000 से अधिक समर्थक विजय के साथ आए थे, जिससे भीड़ आयोजन स्थल की क्षमता से कहीं अधिक बढ़ गई। स्थिति तब बिगड़ गई जब विजय लगभग छह घंटे की देरी से पहुंचे। गर्मी में इंतज़ार कर रहे लोगों में से कई डिहाइड्रेशन के कारण बेहोश हो गए। उत्साही समर्थक विजय की झलक पाने के लिए पेड़ों और दीवारों पर चढ़ गए, जिससे भगदड़ मच गई। इस घटना में 41 लोगों की जान गई और लगभग 110 लोग घायल हुए। इसके तुरंत बाद, विजय और उनकी पार्टी TVK की कड़ी आलोचना हुई।
