तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर लगाया विपक्ष को दबाने का आरोप

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने विपक्ष को दबाने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि इससे जनता का गुस्सा भड़केगा। कांग्रेस नेता के. सेल्वापेरुंथगई ने भी इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और भाजपा की चुनावी रणनीति पर स्टालिन की प्रतिक्रिया।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर लगाया विपक्ष को दबाने का आरोप gyanhigyan

मुख्यमंत्री स्टालिन का भाजपा पर हमला

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष को दबाने के लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई के निवास पर कार्रवाई की। स्टालिन ने ट्विटर पर इस कार्रवाई को एक षड्यंत्र करार दिया और भाजपा पर हार के डर से काम करने का आरोप लगाया।


भाजपा की कार्रवाई पर स्टालिन की प्रतिक्रिया

स्टालिन ने कहा कि भाई सेल्वा पेरुंथगई के चुनावी अभियान को चुप कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह भूलकर कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, भाजपा सरकार हार के डर से विपक्ष को दबाने के लिए अत्याचार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की जनता इसका उचित जवाब देगी। इससे पहले, के. सेल्वापेरुंथगई ने आरोप लगाया था कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने उनके आवास पर छापा मारा और उन्हें श्रीपेरुम्बुदुर विधानसभा क्षेत्र में गैरकानूनी रूप से कैद कर लिया।


सेल्वापेरुंथगई का बयान

सेल्वापेरुंथगई ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव प्रचार के दौरान उनके घर के बाहर हिंदी भाषी आयकर विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति ने उन्हें राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से रोका। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि उनके मित्रों और रिश्तेदारों के आवासों पर भी तलाशी ली गई। उन्होंने इन कार्रवाइयों को अन्यायपूर्ण करार दिया।


भाजपा और एआईएडीएमके पर आरोप

सेल्वापेरुंथगई ने भाजपा और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि पिछले रात से लगभग 10 से 15 हिंदी भाषी अधिकारी, जिन्हें तमिल नहीं आती थी, उनके आवास के बाहर तैनात थे। उन्होंने इन अधिकारियों की निरंतर उपस्थिति को "अत्यंत निंदनीय" बताया और कहा कि उनकी मौजूदगी के कारण वे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।