तंबाकू से कैंसर: जानें इसके संकेत और बचाव के उपाय
तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का खतरा
भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख लोग तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण अपनी जान गंवाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 26.7% भारतीय किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू का सेवन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है, और इसके बावजूद लोग इसकी लत में फंस जाते हैं। इस गंभीर बीमारी के कई लक्षणों को लोग अनदेखा कर देते हैं। हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य तंबाकू से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाना है.
तंबाकू के सेवन के प्रभाव
तंबाकू का सेवन, जैसे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, और खैनी, लाखों लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में ला रहा है। सबसे चिंताजनक यह है कि लोग तंबाकू से होने वाले कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इस विषय पर डॉ. किरण जोशी, जो कि एक्शन कैंसर हॉस्पिटल, दिल्ली में हेड एंड नेक ऑन्को सर्जरी की प्रमुख हैं, ने बताया कि कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब उनकी बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।
कैंसर के संकेत
कैंसर के ये 10 संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज-
- मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले: यदि मुंह के छाले 2-3 हफ्तों तक ठीक नहीं होते हैं, तो यह ओरल कैंसर का संकेत हो सकता है।
- मुंह के अंदर सफेद या लाल दाग: ये प्री-कैंसर स्थिति का संकेत हो सकते हैं।
- मुंह खोलने में परेशानी: यह OSMF जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
- निगलने में दिक्कत: यह गले या फूड पाइप से जुड़े कैंसर का संकेत हो सकता है।
- लगातार गले में खराश: यदि गले में खराश बनी रहती है, तो जांच कराना आवश्यक है।
- आवाज में बदलाव: आवाज का भारी होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है।
- बार-बार खांसी आना: यह फेफड़ों की बीमारी या कैंसर का संकेत हो सकता है।
- बिना कारण वजन घटना: यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
- मुंह या गर्दन में गांठ महसूस होना: यह कैंसर के बढ़ने का संकेत हो सकता है।
- दांत और मसूड़ों में लगातार दर्द या सूजन: इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भारत में तंबाकू का बढ़ता खतरा
भारत में ओरल कैंसर के मामलों की संख्या सबसे अधिक है, विशेषकर उत्तर भारत और ग्रामीण क्षेत्रों में गुटखा और खैनी का सेवन आम है। युवाओं में भी तंबाकू उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। तंबाकू छोड़ने से शरीर धीरे-धीरे ठीक होने लगता है और कैंसर का खतरा भी कम हो सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कैंसर से बचाव के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि लोग समय पर तंबाकू छोड़ दें और जागरूकता बढ़ाएं, तो कैंसर के मामलों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
