डोनाल्ड ट्रंप की नाटो से असंतोष: अमेरिका की रक्षा नीति पर सवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के प्रति अपनी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि अमेरिका अब इस सैन्य गठबंधन से अलग होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने सहयोगी देशों की अनुपस्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद न करने पर नाराज़गी जताई। ट्रंप का मानना है कि नाटो केवल एक कागज़ी शेर है और अब अमेरिका को इस रक्षा संधि से बाहर निकलना मुश्किल है। जानें ट्रंप की चेतावनी और उनके सुझाव क्या हैं।
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नाटो के भविष्य पर खतरा

पश्चिमी सैन्य संगठन नाटो के अस्तित्व पर संकट गहरा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि ईरान के संघर्ष में सहयोगी देशों की अनुपस्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद न करने के कारण अमेरिका नाटो से अलग होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने टेलीग्राफ से बातचीत में कहा कि उन्हें नाटो से कभी भी संतोष नहीं रहा और यह केवल एक कागज़ी शेर है। उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका का नाटो से बाहर निकलना संभव नहीं है। यह संकेत देता है कि व्हाइट हाउस अब यूरोप को एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में नहीं देखता है, क्योंकि सहयोगी देशों ने ट्रंप की मांग को ठुकरा दिया है।


ट्रंप की नाराज़गी के कारण

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे नाटो की अमेरिकी सदस्यता पर पुनर्विचार करेंगे, तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल। मैं कहूंगा कि अब पुनर्विचार संभव नहीं है।" उन्होंने कहा कि नाटो केवल कागज़ी शेर है और पुतिन भी इसे समझते हैं। ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने में सहयोगी देशों की अनिच्छा पर नाराज़गी व्यक्त की। यह जलमार्ग मध्य पूर्व से लगभग 30 प्रतिशत तेल और ऊर्जा की आपूर्ति करता है। ईरान ने हाल ही में अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में इस जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है।


ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य सहयोगियों को चेतावनी दी कि उन्हें अपने लिए लड़ना चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निकालने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए मौजूद नहीं थे। ट्रंप ने सुझाव दिया कि ब्रिटेन जैसे देशों को अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए और जलडमरूमध्य पर कब्जा करने का साहस जुटाना चाहिए।