सर्दियों के दौरान, कई लोग ठंडे हाथ और पैर की समस्या का सामना करते हैं, विशेषकर डायबिटीज के मरीज। यह स्थिति अक्सर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है। आकाश हेल्थकेयर के आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ, डॉ. विक्रम जीत सिंह के अनुसार, यह समस्या नर्व डैमेज और खराब रक्त संचार का संकेत हो सकती है।
ठंडे हाथ-पैर होने के कारण
डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक उच्च शुगर स्तर के कारण रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे धमनियां संकुचित हो जाती हैं, जिससे हाथों और पैरों तक रक्त का प्रवाह सही से नहीं हो पाता, और परिणामस्वरूप ये अंग ठंडे हो जाते हैं। इसके साथ ही, झनझनाहट की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
गैंग्रीन का खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि ठंडे हाथ-पैर खराब रक्त प्रवाह का एक प्रमुख संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खराब रक्त प्रवाह के कारण पैरों में घाव भरने में अधिक समय लग सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। समय के साथ, यह स्थिति गैंग्रीन जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
नर्व डैमेज का प्रभाव
डायबिटीज के मरीजों में ठंडे हाथ-पैर का एक अन्य कारण नर्व डैमेज हो सकता है, जिसे डायबिटीज न्यूरोपैथी के नाम से जाना जाता है। लंबे समय तक उच्च रक्त शुगर स्तर से नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे मरीज को ठंड, गर्मी या दर्द का एहसास कम होता है। यदि ठंड के साथ झनझनाहट भी हो रही है, तो यह नर्व डैमेज का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
बचाव के उपाय
डायबिटीज के मरीजों को सर्दियों में अपने हाथ-पैर को गर्म रखने के साथ-साथ रक्त शुगर को नियंत्रित करना चाहिए। नियमित रूप से चलना, संतुलित आहार लेना और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराना आवश्यक है।
