ठाणे में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा

ठाणे की जिला एवं सत्र अदालत ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में 23 वर्षीय आरोपी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने जांच में लापरवाही के लिए जांच अधिकारी को फटकार लगाई और जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
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ठाणे की अदालत का फैसला

ठाणे, 5 अगस्त: ठाणे की जिला एवं सत्र अदालत ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में 23 वर्षीय व्यक्ति को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है। यह निर्णय आरोपी के खिलाफ जून में दर्ज मामले के केवल दो महीने के भीतर आया है। अदालत ने जांच में लापरवाही बरतने के लिए जांच अधिकारी को फटकार लगाई और मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्त को संबंधित सहायक पुलिस निरीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच करने का आदेश दिया।


दोषी को अतिरिक्त सजा

जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. टी. पवार ने दोषी आजाद उर्फ मुन्नन अर्जुन गौतम को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत भी पांच महीने की कठोर सजा सुनाई। यह सजा 20 साल की सजा के साथ चलेगी। इसके अलावा, अदालत ने आजाद पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यदि वह जुर्माना नहीं चुकाता है, तो उसे अतिरिक्त छह महीने की कठोर सजा भुगतनी होगी।


जुर्माना और अन्य दंड

अदालत ने यह भी कहा कि दोषी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 87 के तहत 5,000 रुपये का अलग से जुर्माना भी देना होगा। यदि वह इस जुर्माने का भुगतान नहीं करता है, तो उसे तीन महीने की अतिरिक्त कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा। इस मामले में 3 जून, 2026 को काशीगांव पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, और 4 अगस्त को अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत के आदेश की प्रति बुधवार को उपलब्ध हुई। विशेष लोक अभियोजक योगेंद्र पाटिल ने अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी की और चार प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।