ठाणे अदालत ने विनायक राउत और परिवार को घरेलू हिंसा मामले में दी अग्रिम जमानत

ठाणे की सत्र अदालत ने शिवसेना (उबाठा) के नेता विनायक राउत और उनके परिवार के सदस्यों को घरेलू हिंसा और काला जादू विरोधी कानून के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दी है। गिरिजा राउत की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने गंभीर उत्पीड़न और तंत्र-मंत्र में जबरन शामिल करने के आरोप लगाए थे। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत का आदेश दिया और कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं।
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अदालत का निर्णय

ठाणे (महाराष्ट्र), 8 अगस्त: महाराष्ट्र के ठाणे की एक सत्र अदालत ने शिवसेना (उबाठा) के नेता और पूर्व सांसद विनायक राउत, उनके बेटे गितेश, और परिवार के तीन अन्य सदस्यों को घरेलू हिंसा और काला जादू विरोधी कानून के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत प्रदान की है। यह मामला विनायक राउत की बहू गिरिजा राउत की शिकायत पर कपूरबावड़ी थाने में दर्ज किया गया था। गिरिजा ने अपने पति और ससुराल वालों पर गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, वैवाहिक दुर्व्यवहार और प्रताड़ना के आरोप लगाए थे.


शिकायत और आरोप

गिरिजा ने यह भी कहा कि उन्हें महाराष्ट्र काला जादू विरोधी कानून का उल्लंघन करते हुए जबरन तंत्र-मंत्र संबंधी गतिविधियों में शामिल किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. पी. अग्रवाल ने शुक्रवार को विनायक राउत, उनके बेटे गितेश, उनकी पत्नी शमाल और अन्य आरोपियों सुरेखा राजेश सरफारे एवं राजेश नारायण सरफारे की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। गिरिजा की शिकायत के बाद कपूरबावड़ी थाने में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय, दुष्ट तथा अघोरी प्रथाओं और काला जादू उन्मूलन अधिनियम, 2013 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.


अदालत के विचार

अदालत ने अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 2018 से 2022 के बीच अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियां हुई थीं, लेकिन इन चार वर्षों में उन्होंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। अदालत ने यह भी कहा कि आरोप प्रथम दृष्टा में महाराष्ट्र काला जादू विरोधी कानून, 2013 के तहत गंभीर 'अघोरी' प्रथाओं की श्रेणी में नहीं आते, जिनमें गंभीर शारीरिक हमला या शरीर को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं.


जमानत की शर्तें

अदालत ने कहा कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चार में से तीन आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके न्याय से भागने की संभावना भी कम है। अदालत ने आदेश दिया कि सभी पांच आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक या दो जमानती मुचलकों पर जमानत दी जाए.


अन्य निर्देश

अदालत ने गितेश राउत को निर्देश दिया कि अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने तक वह हर शुक्रवार शाम सात बजे से आठ बजे के बीच कपूरबावड़ी थाने में उपस्थित रहें। अन्य सह-आरोपियों को भी जांच अधिकारी के बुलाने पर थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.