ट्रेडिंग में तकनीकी गलती से 1.75 करोड़ का मुनाफा: ब्रोकर की जिम्मेदारी पर सवाल

एक ट्रेडर ने तकनीकी गड़बड़ी के चलते 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, लेकिन ब्रोकर ने उसे मुनाफा नहीं दिया। जानें इस मामले में ब्रोकर की जिम्मेदारी और अदालत के फैसले के बारे में। क्या यह मामला ट्रेडिंग सिस्टम की खामियों को उजागर करता है? पढ़ें पूरी कहानी।
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ट्रेडिंग में तकनीकी गड़बड़ी का मामला

फ्यूचर्स और ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग को अक्सर जोखिम भरा माना जाता है, लेकिन हाल ही में एक घटना ने ट्रेडिंग सिस्टम और ब्रोकर की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। इस मामले में एक ट्रेडर, जिसका नाम राजगुरु है, के ट्रेडिंग अकाउंट में ब्रोकर की तकनीकी गलती के कारण अचानक लगभग 40 करोड़ रुपये की मार्जिन लिमिट दिखाई देने लगी। यह राशि उसकी वास्तविक पूंजी नहीं थी, लेकिन सिस्टम में मौजूद इस खामी के चलते वह इतनी बड़ी लिमिट के साथ F&O ट्रेडिंग कर सका।


ट्रेडिंग की शुरुआत में बाजार उसके अनुकूल नहीं था। पहले 20 मिनट में उसे लगभग 54 लाख रुपये का नुकसान हुआ। लेकिन जैसे ही बाजार की दिशा बदली, ट्रेडर ने अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव किया और उसे जल्द ही करीब 2.38 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। इस प्रकार, उसका कुल शुद्ध लाभ 1.75 करोड़ रुपये रहा।


जब ब्रोकर को तकनीकी गलती का पता चला, तो उसने तुरंत मार्जिन लिमिट को सही किया। इसके बाद, ब्रोकरेज और अन्य चार्ज काटकर पूरा मुनाफा अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया गया, जिससे ट्रेडर के खाते में कोई राशि नहीं बची। ट्रेडर ने पहले ब्रोकर के पास और फिर NSE के निवेशक शिकायत सेल में शिकायत की, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने भी उसका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद, उसने NSE अपीलेट फोरम में अपील की, जहां उसके पक्ष में फैसला आया। फोरम ने आदेश दिया कि ट्रेडर को 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा लौटाया जाए और उस पर 12 प्रतिशत ब्याज भी दिया जाए। इसके बाद NSE ने ब्रोकर के खाते से लगभग 2.01 करोड़ रुपये की राशि काट ली।


ब्रोकर कंपनी इस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट गई, लेकिन अदालत ने 3 दिसंबर 2025 को स्पष्ट किया कि तकनीकी गलती ब्रोकर की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रेडर ने न तो धोखाधड़ी की और न ही किसी नियम का उल्लंघन किया। अदालत के अनुसार, यदि ट्रेडिंग में नुकसान होता, तो उसकी जिम्मेदारी ट्रेडर की होती। ऐसे में जब मुनाफा हुआ है, तो उस पर ब्रोकर का कोई अधिकार नहीं बनता।