ट्रंप का ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति पर बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने अपने लक्ष्यों को साझा करते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भी विचार व्यक्त किया। इस लेख में जानें कि ट्रंप के बयानों में कितनी सच्चाई है और अमेरिका की भूमिका क्या है।
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ट्रंप का ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति पर बयान

ट्रंप का बयान


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि "हम अपने लक्ष्यों को पूरा करने के बहुत करीब हैं, क्योंकि हम मध्य पूर्व में ईरान के आतंकवादी शासन के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। (1) ईरानी मिसाइल क्षमता, लॉन्चर और इससे संबंधित सभी चीजों को पूरी तरह से कमजोर करना। (2) ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार को नष्ट करना। (3) उनकी नौसेना और वायु सेना को समाप्त करना, जिसमें एंटी एयरक्राफ्ट हथियार भी शामिल हैं। (4) ईरान को परमाणु क्षमता के करीब भी नहीं आने देना, और हमेशा इस स्थिति में रहना कि अमेरिका ऐसी स्थिति में तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया कर सके। (5) हमारे मध्य पूर्वी सहयोगियों, जिसमें इजराइल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और अन्य शामिल हैं, की उच्चतम स्तर पर सुरक्षा करना।"


उन्होंने यह भी कहा कि "हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और निगरानी अन्य देशों द्वारा की जानी चाहिए जो इसका उपयोग करते हैं — अमेरिका नहीं!" उन्होंने आगे कहा, "यदि पूछा गया, तो हम इन देशों की हॉर्मुज प्रयासों में मदद करेंगे, लेकिन जब ईरान का खतरा समाप्त हो जाएगा, तो इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह उनके लिए एक आसान सैन्य ऑपरेशन होगा।" ट्रंप के बयानों के साथ अक्सर तथ्य और कल्पना को अलग करना मुश्किल होता है। क्या अमेरिका ने अपने मध्य पूर्वी सहयोगियों की सुरक्षा की है? क्या अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग नहीं करता? क्या ट्रंप ने वास्तव में उस युद्ध के लक्ष्यों को प्राप्त किया, जिसे उन्होंने शुरू किया, या वे अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि पीछे हट रहे हैं?