ट्रंप और नेतन्याहू के बीच लेबनान पर तनावपूर्ण बातचीत से बढ़ा पश्चिम एशिया का संकट
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लेबनान पर हुई बातचीत ने पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ा दिया है। ट्रंप ने नेतन्याहू को इजराइली सैन्य कार्रवाई के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिससे इजराइल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। इस बातचीत के बाद, नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि यदि हिजबुल्लाह हमले नहीं रोकता, तो इजराइल कार्रवाई करेगा। इस बीच, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि लेबनान पर हमले जारी रहने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। जानें इस संकट के पीछे की पूरी कहानी।
| Jun 2, 2026, 11:38 IST
लेबनान पर ट्रंप-नेतन्याहू की बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लेबनान को लेकर हुई बातचीत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नया तनाव उत्पन्न कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू को इजराइली सैन्य कार्रवाई के लिए कड़ी फटकार लगाई। खासकर, वह बेरुत पर संभावित हमले और सैन्य अभियान के विस्तार की योजना से बेहद चिंतित थे।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि इस प्रकार की कार्रवाई से इजराइल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक अलग-थलग पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोग इजराइल की मौजूदा कार्रवाई से नाखुश हैं। ट्रंप ने यह भी बताया कि वह इजराइल की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ने लेबनान में आम नागरिकों की मौतों पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि सीमित लक्ष्यों के लिए भारी तबाही मचाना उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि हिजबुल्लाह के हमलों के जवाब में इजराइल को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाई अत्यधिक बढ़ चुकी है।
इस बीच, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि उनकी नेतन्याहू के साथ उपयोगी बातचीत हुई है, जिसके परिणामस्वरूप बेरुत की ओर बढ़ने वाली इजराइली सेना को वापस मोड़ दिया गया है। उन्होंने लिखा कि बेरुत पर कोई हमला नहीं होगा और जो सैनिक वहां जाने वाले थे, उन्हें रोक दिया गया है। ट्रंप ने नेतन्याहू को धन्यवाद देते हुए कहा कि एक बड़ा सैन्य अभियान रोक दिया गया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी बातचीत हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों से भी हुई है और दोनों पक्ष गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, ट्रंप के इस दावे के कुछ ही घंटे बाद नेतन्याहू ने हिब्रू में बयान जारी किया कि यदि हिजबुल्लाह इजराइली शहरों और नागरिकों पर हमले बंद नहीं करता, तो इजराइल बेरुत में आतंकी ठिकानों पर हमला करेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान पहले की तरह जारी रहेगा।
इजराइल के भीतर भी नेतन्याहू के फैसले को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। कई इजराइली अधिकारियों ने ट्रंप के दबाव में लेबनान पर प्रस्तावित हमले को रोकने के निर्णय की आलोचना की है। उनका मानना है कि इससे इजराइल की सैन्य रणनीति और सुरक्षा नीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति भी लगातार कमजोर होती जा रही है। अमेरिका समेत कई देशों ने लेबनान में इजराइली कार्रवाई पर असहमति जताई है, जबकि इजराइल के भीतर भी उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।
दूसरी ओर, क्षेत्रीय तनाव बढ़ता जा रहा है और ईरान ने भी कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे, तो इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका और ईरान के बीच वार्ताओं पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। खबरों के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि लेबनान में इजराइल की कार्रवाई जारी रहती है, तो वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत से पीछे हट सकता है। ट्रंप ने हालांकि आश्वासन दिया कि वार्ताएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं और अगले सप्ताह तक युद्धविराम पर समझौता हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई यह बातचीत हाल के महीनों की सबसे तनावपूर्ण वार्ताओं में से एक रही है। दोनों नेताओं के बीच पहले भी मतभेद रहे हैं, लेकिन इस बार ट्रंप की ओर से नेतन्याहू के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल ने कूटनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। वर्तमान में लेबनान, इजराइल और ईरान से जुड़े हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और पूरी दुनिया की नजर इस संकट के समाधान पर है।
