टोंक जिले में दलित परिवार को 50 वर्षों से भूमि आवंटन का इंतजार
अन्याय का सामना कर रहा दलित परिवार
टोंक जिले की पीपलू तहसील के नवरंगपुरा गांव में एक गरीब अनुसूचित जाति (दलित) परिवार लंबे समय से अन्याय का शिकार हो रहा है। 1975 में बद्री लाल बैरवा के परिवार को खसरा नंबर 45 (अब 88/3) में 5 बीघा 6 बीसवा भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और प्रभावशाली व्यक्तियों के अतिक्रमण के कारण यह भूमि अभी भी गैर-खातेदारी में दर्ज है।
अधिकारियों से निरंतर निवेदन
बद्री लाल बैरवा ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, और अन्य उच्च अधिकारियों को कई बार निवेदन किए, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
जिला स्तर पर कार्रवाई की कमी
अनेक आदेश जारी होने के बावजूद, जिला स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बद्री लाल ने पीपलू तहसीलदार पर आरोप लगाया कि उन्होंने गलत तरीके से आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन तहसीलदार ने अतिक्रमणियों के खिलाफ गलत तरीके से मामला दर्ज किया।
अनुसूचित जाति की भूमि पर कब्जा हटाने की जिम्मेदारी
राजस्व विभाग के परिपत्र के अनुसार, अनुसूचित जाति की भूमि पर अवैध कब्जा हटाने की जिम्मेदारी तहसीलदार की होती है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय की प्रतीक्षा
बद्री लाल बैरवा ने कहा कि 50 साल बीत गए हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। गरीब परिवार की आजीविका प्रभावित हो रही है, और प्रशासन आदेशों को नजरअंदाज कर रहा है। अब यह देखना है कि कब तक यह अन्याय जारी रहेगा और कब इस दलित किसान परिवार को उनका हक मिलेगा।
