टाटा संस की बोर्ड मीटिंग: घाटे में चल रही कंपनियों की स्थिति पर चर्चा
टाटा ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक
टाटा ग्रुप की मूल कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल की आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में उन कंपनियों के प्रदर्शन पर चर्चा की जाएगी जो आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मीटिंग में विशेष रूप से घाटे में चल रही कंपनियों द्वारा अपने व्यवसाय की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुति दी जा सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि इस बैठक में एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर चर्चा नहीं होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ग्रुप के भीतर उच्च स्तर पर मतभेदों की खबरें आ रही हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में टाटा ग्रुप को हुआ बड़ा नुकसान
सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन ने हाल ही में ग्रुप की कंपनियों के प्रदर्शन पर चर्चा की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रुप की गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को 10,905 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसके अलावा, इस नुकसान के बढ़कर 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। टाटा ग्रुप में टाटा ट्रस्ट्स की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। हाल के महीनों में ग्रुप में उच्च स्तर पर मतभेद, कुछ सदस्यों को हटाने की कोशिशें और चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। खबरों के अनुसार, नोएल टाटा को टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार और घाटे में चल रही एयर इंडिया के प्रदर्शन को लेकर चिंता है। इनमें से अधिकांश व्यवसाय एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के प्रमुख रहते समय शुरू हुए थे।
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टाटा संस के आईपीओ पर मतभेद
इसके अतिरिक्त, नोएल टाटा के टाटा संस का आईपीओ लाने को लेकर भी मतभेद हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को एक बड़े नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में मान्यता दी है और घरेलू शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए कहा है। टाटा ग्रुप के मौजूदा घटनाक्रम पर टाटा ट्रस्ट्स के एक प्रतिनिधि से संपर्क नहीं हो पाया। इस बीच, प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इनगवर्न ने कहा है कि टाटा संस जैसी बड़ी कंपनी का सूचीबद्ध होना आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता और कॉरपोरेट संचालन को मजबूत किया जा सके।
