झारखंड में माओवादी नेता की गिरफ्तारी, नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार

झारखंड की पुलिस ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया है, जो 2.20 करोड़ रुपये के इनाम पर वांछित था। उसकी गिरफ्तारी से राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस ऑपरेशन में दो अन्य नक्सलियों को भी पकड़ा गया है, जो कई गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। जानें इस गिरफ्तारी के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव।
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माओवादी नेता की गिरफ्तारी

रांची, 29 जुलाई: झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने बुधवार को जानकारी दी कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को धनबाद जिले से गिरफ्तार किया गया है। उस पर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था और वह 175 मामलों में वांछित था। डीजीपी ने बताया कि देश के सबसे वांछित नक्सलियों की गिरफ्तारी के साथ राज्य में नक्सलवाद का लगभग अंत हो गया है।


गिरफ्तारी का विवरण

65 वर्षीय बेसरा को मंगलवार शाम ‘ऑपरेशन दौड़ा पहाड़’ के तहत धनबाद जिले के बरवड्डा थानाक्षेत्र के मनियाडीह से पकड़ा गया। वह गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का निवासी है और भाकपा (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य था। पुलिस ने बताया कि झारखंड और ओडिशा सरकारों ने इस शीर्ष माओवादी पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था।


अन्य गिरफ्तारियां

डीजीपी ने बताया कि इस अभियान में दो अन्य नक्सलियों—15 लाख रुपये का इनाम पाने वाले मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया। तीनों नक्सली मिलकर 320 आपराधिक मामलों में वांछित थे। बेसरा, जिसे सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाता है, 1980 में इस संगठन में शामिल हुआ और 2003 में केंद्रीय समिति का सदस्य बना।


नक्सल गतिविधियों का विस्तार

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बेसरा ने झारखंड और आस-पास के राज्यों में माओवादी नेटवर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। झारखंड पुलिस के महानिरीक्षक (अभियान) नरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों नक्सली कई बड़े हमलों में शामिल रहे हैं, जिनमें बिहार के जहानाबाद जेल से भागने का मामला, बैंक डकैती, और कई आईईडी विस्फोट शामिल हैं।


भाई की प्रतिक्रिया

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी पर उसके भाई देवलाल बेसरा ने कहा कि परिवार को मंगलवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली। उन्होंने बताया, "वह 1986-87 के बाद कभी घर नहीं आया। हमने कई बार उससे मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।"


आत्मसमर्पण की घटनाएं

ये गिरफ्तारियां झारखंड पुलिस के समक्ष 16 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के कुछ घंटे बाद हुईं। आत्मसमर्पण करने वालों में छह ऐसे नक्सली शामिल थे, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम था।