ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान के लाभ: जानें क्या करें दान
ज्येष्ठ पूर्णिमा दान के लाभ
31 मई को अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा के साथ-साथ गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस बार की ज्येष्ठ पूर्णिमा विशेष है क्योंकि यह अधिकमास में आ रही है, जो हर तीन साल में एक बार होती है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान के लिए शुभ वस्तुएं
मौसमी फलों का दान
इस दिन मौसमी फलों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौसमी फलों का दान करने से मानसिक शांति मिलती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है.
पीले अनाज का दान
ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर पीले अनाज का दान भी बहुत शुभ है। यह तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है, इसलिए इस दिन पीले रंग की वस्तुओं जैसे चने की दाल, बेसन, या हल्दी का दान करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से करियर और व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
घड़े का दान
ज्येष्ठ का महीना साल का सबसे गर्म महीना होता है। इस दौरान जल से जुड़ी वस्तुओं का दान महादान माना जाता है। इस दिन किसी मंदिर में या जरूरतमंद को मिट्टी का घड़ा पानी भरकर दान करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और कुंडली का सूर्य दोष शांत होता है.
दूध, चावल और चांदी
जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या जिन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है, उन्हें सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए। पूर्णिमा के दिन दूध, चावल, चीनी या चांदी का दान करने से मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है.
