जौहर यूनिवर्सिटी की सुरक्षा पर कांग्रेस सांसद का बयान

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जौहर यूनिवर्सिटी की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है, यह कहते हुए कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह राजनीतिक प्रतिशोध से ऊपर उठे। वहीं, महबूबा मुफ्ती ने प्रस्तावित तोड़-फोड़ की निंदा की और छात्रों से समर्थन की अपील की। यह विवाद तब बढ़ा जब मुरादाबाद डिविजनल कमिश्नर ने इन इमारतों को गिराने पर अस्थायी रोक लगा दी।
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जौहर यूनिवर्सिटी की विरासत की रक्षा की आवश्यकता

कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मंगलवार को कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है और इसे गिराने के बजाय संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने एक बयान में कहा कि जब किसी देश में विश्वविद्यालयों को ध्वस्त करने के आदेश दिए जाते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि यह आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करने की बजाय उन्हें अशिक्षित रखने की साजिश है। प्रतापगढ़ी ने सरकार से आग्रह किया कि उसे राजनीतिक प्रतिशोध से ऊपर उठकर सोचना चाहिए।


जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई पर विवाद

उन्होंने आगे कहा कि यह सकारात्मक है कि कमिश्नर ने यह समझा कि शिक्षा के संस्थानों को तोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए। यह टिप्पणी रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के प्रस्ताव के संदर्भ में आई है। मुरादाबाद डिविजनल कमिश्नर की अदालत ने सोमवार को इन इमारतों को गिराने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी है।


महबूबा मुफ्ती का विरोध

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को इस प्रस्तावित तोड़-फोड़ की निंदा करते हुए इसे "नफरत और प्रतिशोध" का कार्य बताया। उन्होंने छात्रों से समर्थन की अपील की। मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जौहर यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थान को नष्ट करना केवल नफरत और प्रतिशोध का प्रतीक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हाल के विरोध प्रदर्शनों से सीखने का आग्रह किया।


शिक्षा बचाओ आंदोलन

यादव ने कहा कि 'शिक्षा बचाओ' आंदोलन भी सफल होगा। रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए धरने पर बैठे छात्रों का हौसला बढ़ाने के लिए सांसद और विधायक भी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक आदेशों से अन्य निर्माणों को नियमित किया जा सकता है, तो जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माणों को नियमित क्यों नहीं किया जा सकता? उन्होंने यह भी पूछा कि बीजेपी सरकार अन्य निर्माणों को नियमित कर सकती है, तो जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में ऐसा भेदभाव क्यों?


राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर

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