जोजिला सुरंग परियोजना ने हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि, संपर्क में आएंगे कश्मीर और लद्दाख

जोजिला सुरंग परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है, जिससे कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क में सुधार होगा। इस सुरंग का निर्माण समुद्र तल से ऊंचाई पर हो रहा है और यह दुनिया की सबसे लंबी एकल नली दोतरफा सड़क सुरंगों में से एक मानी जाती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर विस्फोट किया, जिससे सुरंग के दोनों सिरों के बीच केवल तीन मीटर चट्टान बची है। यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास, पर्यटन और सुरक्षा को भी नई दिशा देगी।
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जोजिला सुरंग परियोजना ने हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि, संपर्क में आएंगे कश्मीर और लद्दाख gyanhigyan

जोजिला सुरंग की ऐतिहासिक उपलब्धि

जोजिला सुरंग परियोजना ने आज एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। यह सुरंग, जो समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर बन रही है, दुनिया की सबसे लंबी एकल नली दोतरफा सड़क सुरंगों में से एक मानी जाती है। आज इस सुरंग में अंतिम चट्टानी अवरोध को तोड़ने के लिए विस्फोट किया गया, जिसे परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक विशेष समारोह में भाग लिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए।


सुरंग के निर्माण की प्रगति

अधिकारियों के अनुसार, अब सुरंग के दोनों सिरों के बीच केवल लगभग तीन मीटर चट्टान बची है। अंतिम विस्फोट के बाद, कश्मीर के सोनमर्ग के बालटाल क्षेत्र और लद्दाख के मीनामर्ग के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


परियोजना की लागत और महत्व

यह सुरंग लगभग 11578 फुट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है और इसकी लागत लगभग 6500 करोड़ रुपये है। यह भारत की पर्वतीय आधारभूत संरचना की सबसे महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, और यह श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद, नागरिकों और सेना की आवाजाही अधिक तेज और सुरक्षित हो जाएगी।


सुरंग के तकनीकी पहलू

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंग के दोनों सिरों के जुड़ने के बाद, अंदर वायु प्रवाह में सुधार होगा, जिससे शेष निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना अगले दो वर्षों में पूरी होने की संभावना है, लेकिन आपात स्थिति में सुरंग का उपयोग पहले भी किया जा सकता है।


सुरक्षा और तकनीकी सुविधाएं

इस परियोजना में अत्याधुनिक सुरक्षा और तकनीकी सुविधाओं का उपयोग किया गया है। सुरंग में निरंतर वायु प्रवाह बनाए रखने के लिए अर्ध अनुप्रस्थ वायु संचार प्रणाली स्थापित की गई है। इसके अलावा, स्मार्ट सुरंग प्रणाली भी विकसित की गई है, जो नई आस्ट्रियाई सुरंग तकनीक पर आधारित है। निगरानी कैमरे, रेडियो संचार प्रणाली, निर्बाध बिजली आपूर्ति और आधुनिक वायु संचार सुविधाएं भी शामिल हैं।


श्रमिकों की मेहनत

परियोजना के निर्माण में लगभग 1400 श्रमिक कार्यरत हैं, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। यहां हर वर्ष लगभग सौ दिनों तक तापमान शून्य से 20 से 30 डिग्री नीचे चला जाता है। निर्माण स्थल पर अब तक पांच बड़े हिमस्खलन भी आ चुके हैं, जिनमें से दो घटनाओं में मशीनों को नुकसान पहुंचा।


केंद्रीय मंत्री का बयान

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हिमालय की दुर्गम ऊंचाइयों में भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण आधारभूत संरचना आकार ले रही है। उन्होंने लद्दाख के मिनीमर्ग स्थित सुरंग के ईस्ट पोर्टल पर विस्फोट किया। जोजिला सुरंग को इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है, जो कश्मीर और लद्दाख के बीच विकास, पर्यटन, व्यापार और सुरक्षा को नई दिशा देने वाली परियोजना है।