जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा, मोदी कैबिनेट में सफर समाप्त
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति ने तुरंत स्वीकार कर लिया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। कुरियन, जो 1980 से बीजेपी से जुड़े रहे हैं, ने अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका इस्तीफा राज्यसभा के कार्यकाल समाप्त होने के बाद आया है, जिससे उन्हें मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल हो गया। जानें उनके राजनीतिक सफर और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
| Jun 23, 2026, 11:55 IST
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अपना इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस प्रकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में जॉर्ज कुरियन का सफर समाप्त हो गया है, जबकि उन्हें केंद्र सरकार में शामिल हुए एक साल से भी कम समय हुआ था।
राष्ट्रपति का आधिकारिक बयान
राष्ट्रपति भवन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर कुरियन का इस्तीफा स्वीकार किया है। बयान में कहा गया, "भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर, संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, श्री जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।"
जॉर्ज कुरियन की पृष्ठभूमि
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन ने अगस्त 2024 से अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वह बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता हैं और 1980 में पार्टी के गठन के समय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कई संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।
राज्यसभा कार्यकाल का प्रभाव
उनका इस्तीफा राज्यसभा के कार्यकाल समाप्त होने के बाद आया है, जिससे उन्हें बिना पुनः चुने या नामांकित हुए मंत्री पद पर बने रहना कठिन हो गया था।
कुरियन का धार्मिक और राजनीतिक सफर
जॉर्ज कुरियन सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के सदस्य हैं, जो केरल के प्रमुख ईसाई समुदायों में से एक है। वह 1980 से बीजेपी से जुड़े रहे हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं, जिनमें राज्य महासचिव और भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव शामिल हैं।
चुनाव में हार
2016 के केरल विधानसभा चुनावों में, कुरियन ने पुथुपल्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी से हार गए। इससे पहले, उन्होंने वरिष्ठ बीजेपी नेता ओ. राजगोपाल के 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) के रूप में भी कार्य किया था।
