जैश-ए-मोहम्मद ने एआई का उपयोग कर युवाओं को भड़काने की नई रणनीति अपनाई
जैश-ए-मोहम्मद की नई तकनीकी रणनीति
नई दिल्ली। पाकिस्तान के समर्थन से चलने वाले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपने अस्तित्व को बनाए रखने और नए आतंकियों की भर्ती के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' में मिली हार के बाद, इस संगठन में नए सदस्यों की भर्ती लगभग ठप हो गई थी। इस संकट से उबरने के लिए, संगठन अब अपने नेता मसूद अजहर के एआई द्वारा निर्मित फर्जी ऑडियो और डीपफेक वीडियो तैयार कर रहा है, ताकि यह दिखाया जा सके कि वह सक्रिय और जीवित है।
आतंकवादी संगठनों में एआई का बढ़ता उपयोग
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया भर के आतंकवादी संगठनों में इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा ने सबसे पहले एआई तकनीक का उपयोग किया था, जिसमें इस्लामिक स्टेट ने इसे तेजी से फैलाया। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन अब तक पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थे। लेकिन अब, भारतीय सुरक्षा बलों के कड़े प्रहारों के कारण, जैश-ए-मोहम्मद ने भी डिजिटल तकनीक को अपने प्रचार का मुख्य हिस्सा बना लिया है।
सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री का प्रसार
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद एआई तकनीक से बने फर्जी वीडियो और ऑडियो को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों पर फैलाने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जब संगठन का नेतृत्व भूमिगत हो गया, तब उसे अपनी साख बनाए रखने के लिए इस तरह के उपायों की आवश्यकता महसूस हुई। इंटेलिजेंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने जैश के मुख्यालय को नष्ट कर दिया था, जिससे संगठन का ढांचा कमजोर हो गया।
नए सदस्यों की भर्ती में बाधा
मुख्यालय के नष्ट होने और मसूद अजहर के लंबे समय से गायब रहने के कारण, संगठन में नई भर्तियों पर रोक लग गई थी। नए सदस्यों और युवाओं के बीच यह सवाल उठने लगा था कि उनका नेता कहां है। कोई भी ऐसे संगठन में शामिल होने के लिए आगे नहीं आ रहा था, जिसका नेता मृत या निष्क्रिय माना जा रहा हो।
जैश का डिजिटल प्रयास
इस भ्रम को तोड़ने और अपने आतंकियों का मनोबल बढ़ाने के लिए, जैश अब एआई तकनीक का उपयोग कर मसूद अजहर के सक्रिय और स्वस्थ होने के फर्जी क्लिप बना रहा है। इन वीडियो संदेशों में मसूद अजहर को भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने और युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हुए दिखाया जा रहा है। इस नई रणनीति के बाद, भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं और संदिग्ध एआई सामग्री के प्रसार पर नजर रख रही हैं।
