जेएनयू में नारेबाजी पर प्रशासन की सख्त प्रतिक्रिया
जेएनयू प्रशासन की कार्रवाई
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रशासन ने सोमवार शाम को परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों द्वारा लगाए गए भड़काऊ नारों के वायरल वीडियो पर गंभीरता से प्रतिक्रिया दी है। विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि जेएनयूएसयू से जुड़े छात्रों के एक समूह ने अत्यधिक आपत्तिजनक और उत्तेजक नारे लगाए, जिसके परिणामस्वरूप अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई की।
जांच और सुरक्षा के निर्देश
जेएनयू प्रशासन ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी ने इस घटना का गंभीर संज्ञान लिया है और विश्वविद्यालय की सुरक्षा शाखा को पुलिस के साथ मिलकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की नारेबाजी लोकतांत्रिक असहमति के मानकों के अनुरूप नहीं है और यह जेएनयू के आचार संहिता का उल्लंघन करती है। इससे परिसर में शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
संविधान और सार्वजनिक अव्यवस्था
बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह कृत्य संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक संवाद के स्थापित मानदंडों का जानबूझकर उल्लंघन करता है। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे ऐसी गतिविधियों से दूर रहें और परिसर में शांति बनाए रखने में मदद करें। साथ ही, चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट में साजिश का संकेत
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा प्रॉक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हाल ही में परिसर में लगाए गए आपत्तिजनक नारे जानबूझकर और सोची-समझी साजिश के तहत लगाए गए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2020 के दिल्ली दंगों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद नारेबाजी शुरू हुई।
