जुबीन गर्ग की मृत्यु: सिंगापुर में जांच और भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जुबीन गर्ग की मृत्यु ने सिंगापुर में जांच और भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। सिंगापुर की अदालत ने बताया कि उनकी मृत्यु डूबने से हुई, जबकि असम में कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। इस मामले में सच्चाई की खोज और विभिन्न निष्कर्षों के बीच जटिलता बढ़ रही है। क्या जुबीन गर्ग के प्रशंसकों को न्याय मिलेगा? जानें पूरी कहानी में।
| Jan 15, 2026, 20:28 IST
जुबीन गर्ग की मृत्यु की जांच में नए खुलासे
सिंगापुर में असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की मृत्यु से जुड़ी नई जानकारियों ने घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है, साथ ही भारत में जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर कई सवाल भी खड़े किए हैं। सिंगापुर की अदालत में बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार, जुबीन गर्ग की मृत्यु लाजरस आइलैंड के पास डूबने से हुई, जिसमें किसी प्रकार की साजिश या आपराधिक गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं।
याट पर जुबीन गर्ग का अनुभव
सिंगापुर पुलिस ने अदालत को बताया कि 19 सितंबर को जुबीन गर्ग लगभग बीस दोस्तों और सहकर्मियों के साथ एक याट पर थे। यह याट मारिना एट केपल बे से रवाना होकर लाजरस और सेंट जॉन्स आइलैंड के बीच रुकी थी। इस दौरान याट पर नाश्ता, पेय और शराब का सेवन किया गया। गवाहों के अनुसार, जुबीन गर्ग ने जिन और व्हिस्की सहित कई कप शराब पी थी और वह उस समय अत्यधिक नशे में थे।
तैराकी के दौरान जुबीन गर्ग की स्थिति
पुलिस के अनुसार, जुबीन गर्ग ने पहले एक बड़ी लाइफ जैकेट पहनकर तैराकी की, लेकिन थकान की वजह से याट पर लौट आए। जब उन्होंने दोबारा तैरने का निर्णय लिया, तो उन्हें एक छोटी लाइफ जैकेट दी गई, जिसे उन्होंने पहनने से मना कर दिया। वह बिना लाइफ जैकेट के अकेले लाजरस आइलैंड की दिशा में तैरने लगे। गवाहों ने बताया कि उन्हें वापस आने के लिए आवाज दी गई, लेकिन कुछ ही समय बाद उनका शरीर ढीला पड़ गया और वह पानी में औंधे तैरते दिखे।
बचाव प्रयास और मृत्यु की पुष्टि
याट पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव की कोशिश की और सीपीआर दिया गया। नौ मिनट के भीतर पुलिस कोस्ट गार्ड मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक उनकी नाड़ी नहीं चल रही थी। उन्हें सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां शाम पांच बजकर पंद्रह मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण डूबना बताया गया।
टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट के निष्कर्ष
टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में जुबीन गर्ग के रक्त में शराब की मात्रा 333 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर पाई गई, जो सिंगापुर की कानूनी सीमा से चार गुना अधिक है। रिपोर्ट में उनके उच्च रक्तचाप और मिर्गी की दवाओं के अंश भी मिले, लेकिन किसी अन्य नशीले पदार्थ के संकेत नहीं मिले। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना के दिन उन्होंने मिर्गी की दवा समय पर ली थी या नहीं।
सिंगापुर पुलिस की स्थिति
सिंगापुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी प्रकार की साजिश या जबरन पानी में धकेले जाने के सबूत नहीं मिले हैं। अदालत में यह भी कहा गया कि जुबीन गर्ग में आत्मघाती प्रवृत्ति नहीं थी और उन्होंने स्वयं तैरने के लिए पानी में छलांग लगाई थी। इस मामले में कोरोनर कोर्ट द्वारा एक तटस्थ निष्कर्ष जैसे दुर्घटनावश मृत्यु दर्ज किए जाने की संभावना जताई गई है।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारत में, विशेषकर असम में, इस मृत्यु को लेकर स्थिति अलग है। असम पुलिस की विशेष जांच टीम और सीआईडी ने कई लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें आयोजनकर्ता श्यामकानु महंता, जुबीन गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, उनके रिश्तेदार संदीपन गर्ग और दो निजी सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। गुवाहाटी की अदालत ने पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा है।
मुख्यमंत्री का बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे न्याय की दिशा में एक कदम बताते हुए कहा है कि सिंगापुर पुलिस और असम पुलिस की टीमों के बीच समन्वय बैठक होगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि जब सिंगापुर प्रशासन मृत्यु को प्राकृतिक और दुर्घटनाजन्य बता रहा है, तो असम सरकार किस आधार पर इसे हत्या बता रही है।
जुबीन गर्ग की मृत्यु का जटिल पहलू
जुबीन गर्ग की मृत्यु केवल एक लोकप्रिय कलाकार के असमय चले जाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि जब भावनाएं, राजनीति और जांच एक साथ उलझ जाती हैं, तो सच तक पहुंचना कितना जटिल हो जाता है। सिंगापुर की जांच प्रक्रिया ने तथ्यों, गवाहियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर एक स्पष्ट तस्वीर पेश की है। वहीं असम में चल रही जांच और राजनीतिक बयानबाजी ने संदेह और भ्रम को बढ़ाया है।
सच्चाई की खोज
यदि दो देशों की जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अलग हैं, तो कई सवाल उठने स्वाभाविक हैं। जुबीन गर्ग के प्रशंसकों और परिवार के लिए सच्चा न्याय तभी संभव है, जब सच्चाई को बिना किसी पूर्वाग्रह के स्वीकार किया जाए। यही उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
