जीवन बीमा में सरेंडर और निकासी का बढ़ता रुझान: आंकड़े बताते हैं
सरेंडर और निकासी में वृद्धि
नई दिल्ली, तीन अगस्त: सरकार ने सोमवार को संसद में जानकारी दी कि जीवन बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले कुल लाभ में सरेंडर (पॉलिसी का समय से पहले बंद होना) और निकासी (पैसे निकालना) की हिस्सेदारी 2021-22 के 32 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 39 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पिछले पांच वर्षों में सरेंडर और निकासी के रुझान में वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन बीमा कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले कुल लाभ में मैच्योरिटी लाभ का हिस्सा 2021-22 में 48 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 37 प्रतिशत हो गया है। बीमा नियामक इरडाई ने बताया कि पॉलिसी सरेंडर और जल्दी पॉलिसी छोड़ने के कई कारण होते हैं, जैसे कि खरीदे गए उत्पाद की असंगति, प्रीमियम का बोझ न उठा पाना, पॉलिसी धारक की अपेक्षाओं का पूरा न होना, गलत तरीके से बेचना, बीमा उत्पाद के बारे में धारक की जानकारी की कमी, और धारकों की वित्तीय स्थिति में बदलाव।
उन्होंने बताया कि पॉलिसी धारकों के हितों की सुरक्षा और सही सरेंडर लाभ सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडाई) ने ‘इरडाई (बीमा उत्पाद) विनियमन, 2024’ और जीवन बीमा उत्पादों पर ‘मास्टर सर्कुलर 2024’ के माध्यम से सरेंडर से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है, जो सरेंडर के मूल्य से जुड़े नियमों के साथ विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करती है।
