जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया है। मिश्रा का वायुसेना में चार दशकों का अनुभव उन्हें राम मंदिर के प्रशासन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार करता है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मंदिर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रशासनिक कार्यों का दायरा बढ़ रहा है। जानें उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और नई जिम्मेदारियों के बारे में।
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अयोध्या में नया नेतृत्व


अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में लगभग चार दशकों तक सेवा की, जिसमें उन्होंने फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। अब, उनका अनुभव राम मंदिर के प्रशासन और संचालन में महत्वपूर्ण साबित होगा।


CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ट्रस्ट की बैठक में की गई। CEO पद के लिए कई आवेदन प्राप्त हुए थे, और चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें चुना गया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रशासनिक, वित्तीय, और संचालन संबंधी कार्यों का दायरा बढ़ रहा है।


वायुसेना में करियर की शुरुआत

जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला। उन्होंने फाइटर पायलट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे वायुसेना के उच्च पदों तक पहुंचे।


अपने चार दशकों के करियर में, उन्होंने फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के रूप में कार्य किया। वे अमेरिका के Air Command and Staff College के पूर्व छात्र भी हैं।


कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा। उस समय वे मिराज-2000 के ऑपरेशनल मिशनों का हिस्सा थे और लेजर-गाइडेड बमों के उपयोग में शामिल थे।


कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और मिश्रा का अनुभव इस दौरान उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।


टेस्ट पायलट के रूप में पहचान

जितेंद्र मिश्रा ने टेस्ट पायलट के रूप में भी महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया। वे Aircraft and Systems Testing Establishment (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट और बाद में कमांडेंट रहे।


टेस्ट पायलट का कार्य विमान की क्षमता और सिस्टम का परीक्षण करना होता है, जिसके लिए तकनीकी समझ और सटीक निर्णय क्षमता की आवश्यकता होती है।


वेस्टर्न एयर कमांड की कमान

अपने करियर के अंतिम चरण में, मिश्रा भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) रहे।


इस भूमिका में, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रणनीतिक और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।


उड़ान का अनुभव

जितेंद्र मिश्रा के पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है और उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी है।


उनका यह सफर फाइटर पायलट से लेकर टेस्ट पायलट और फिर वरिष्ठ कमांडर तक का है, जो उनकी बहुआयामी विशेषज्ञता को दर्शाता है।


रिटायरमेंट और नई जिम्मेदारी

जितेंद्र मिश्रा 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका मिली है।


राम मंदिर अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को संभालने के लिए सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था, और प्रशासन से जुड़े कई कार्यों की आवश्यकता है।


नई उम्मीदें और चुनौतियाँ

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी तरीके से संभाला जाए और श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाया जाए।


एक अनोखा सफर

जितेंद्र मिश्रा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका करियर एक असाधारण बदलाव दिखाता है।


एक तरफ उन्होंने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर शुरुआत की, और अब वे राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के रूप में एक नई जिम्मेदारी संभालेंगे।