जावेद इक़बाल: पाकिस्तान का कुख्यात सीरियल किलर
जावेद इक़बाल की भयावह कहानी
जावेद इक़बाल एक मनोवैज्ञानिक किलर था, जिसने बच्चों को फंसाने के लिए कई चालाकी भरे तरीके अपनाए। 1998 से 1999 के बीच, उसने 100 बच्चों की हत्या की और अपने अपराधों का बारीकी से रिकॉर्ड रखा। अंततः, उसने खुद को पुलिस और मीडिया के सामने पेश किया।
खुद को कबूल करने वाला कातिल
30 दिसंबर, 1999 को जावेद इक़बाल को गिरफ्तार किया गया। वह 20वीं सदी के सबसे क्रूर सीरियल किलर्स में से एक था। उसने एक प्रमुख उर्दू अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने 100 बच्चों की हत्या की है।"
खत के माध्यम से खुलासा
2 दिसंबर, 1999 को एक पत्र, जिसमें बच्चों की तस्वीरें थीं, एक प्रमुख अखबार के दफ्तर पहुंचा। रिपोर्टर जमील चिश्ती ने जब पत्र पढ़ा, तो उसे यकीन हुआ कि यह मजाक नहीं है। पत्र में बच्चों को फंसाने और उनकी हत्या करने के तरीकों का विस्तार से वर्णन था।
रिपोर्टर की खोज
जब रिपोर्टर ने दिए गए पते पर जाकर जांच की, तो उसे घर पर ताला लगा मिला। दीवार फांदकर अंदर जाने पर, उसे सब कुछ वैसा ही मिला जैसा पत्र में लिखा था। वहां बच्चों के कपड़े और शरीर के अंगों के अवशेष मिले।
पुलिस की लापरवाही
हत्यारे की तलाश में, यह पता चला कि उसने एक महीने पहले पुलिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें उसने अपने अपराधों को कबूल किया था। हालांकि, पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
व्यापारी का बेटा और अपराधी
जावेद इक़बाल एक प्रसिद्ध व्यापारी का बेटा था। उसने अपने घर में कई लड़कों के साथ रहकर उनके साथ यौन शोषण किया। जब उसके परिवार को इसके बारे में पता चला, तो उन्होंने उसे रोकने के बजाय इलाके को छोड़ दिया।
समलैंगिकता और अपराध
जावेद इक़बाल समलैंगिक था और सामाजिक वर्जनाओं के कारण अपने परिवार से इस बारे में बात नहीं कर सका। उसने 17 साल की उम्र में पहले अपराध के बाद ठान लिया कि वह 100 माताओं को रुलाएगा।
व्यापार और शोषण
जावेद ने एक वीडियो गेम की दुकान खोली और बच्चों को लुभाने के लिए कई चालाकी भरे तरीके अपनाए। जब लोग अपने बच्चों को उसकी दुकान पर भेजना बंद कर दिए, तो उसने अन्य व्यवसाय शुरू किए।
सजा और आत्महत्या
जावेद को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन उसे कभी फांसी नहीं दी गई। 8 अक्टूबर, 2001 को उसकी और उसके साथी की लाशें जेल में मिलीं। उनकी मौत को आत्महत्या माना गया, लेकिन कई लोग मानते हैं कि उसे हत्या की गई थी।
