जामिया मिलिया इस्लामिया में आरएसएस कार्यक्रम पर विवाद और कुलपति का बयान
जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने आरएसएस द्वारा आयोजित 'युवा कुंभ' कार्यक्रम में महादेव के डीएनए का जिक्र किया, जिससे विवाद खड़ा हो गया। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कार्यक्रम के खिलाफ कई छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि कुलपति ने आरएसएस नेताओं का स्वागत किया। इस घटनाक्रम पर विश्वविद्यालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या प्रतिक्रियाएं आई हैं।
| Apr 29, 2026, 17:11 IST
कुलपति का बयान और महादेव का डीएनए
जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने मंगलवार को दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय में आरएसएस द्वारा आयोजित 'युवा कुंभ' कार्यक्रम में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, "सभी भारतीयों का डीएनए महादेव का डीएनए है।" उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। आसिफ ने भारत की विविधता पर जोर देते हुए कहा कि लोग विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे भारतीयता के बंधन में बंधे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि "महादेव का डीएनए हमारे भीतर प्रवाहित होता है।" इसके साथ ही, उन्होंने सनातन संस्कृति को सहअस्तित्व को बढ़ावा देने वाली प्रणाली के रूप में वर्णित किया, जिसमें विभिन्न प्राणी एक साथ रहते हैं।
आरएसएस कार्यक्रम का विरोध
आरएसएस के एक कार्यक्रम ने विवाद को जन्म दिया
यह कार्यक्रम जामिया परिसर में आयोजित किया गया था, जिसके खिलाफ कई छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) जैसे संगठनों ने इस कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाई थी। सुरक्षा के लिहाज से परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कार्यक्रम के दौरान, कुलपति ने आरएसएस नेताओं का स्वागत किया और उन्हें आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। इसी बीच, विरोध कर रहे छात्रों ने परिसर में एकत्र होकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। एआईएसए दिल्ली के अध्यक्ष और जामिया के छात्र कॉमरेड सैयद ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय की आलोचना की, जिसमें आरएसएस को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि जामिया में अध्ययन सभा आयोजित करने के लिए छात्रों को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जबकि आज आरएसएस को एक एसी हॉल में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
कुलपति के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाओं का सामना कर रहा है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनके एकता के संदेश का समर्थन किया, जबकि अन्य ने कार्यक्रम की प्रकृति और विश्वविद्यालय के केंद्रीय परिसर में इसके आयोजन पर सवाल उठाए। विश्वविद्यालय ने इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
