जापानी जीवनशैली: स्ट्रोक से बचाव के लिए गर्म पानी से पैरों की सिकाई का रहस्य
जापानी लोगों की स्वस्थ जीवनशैली
जापान के नागरिकों का जीवनशैली आजकल विश्वभर में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। ये लोग लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए जाने जाते हैं। उनकी सेहत का राज उनकी संतुलित आहार, सक्रिय दिनचर्या और अनुशासित जीवनशैली में छिपा है। इसीलिए, जापान में क्रोनिक बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग की घटनाएं अन्य देशों की तुलना में कम हैं। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह ने इंस्टाग्राम पर एक ऐसा जापानी रहस्य साझा किया है, जो स्ट्रोक से बचने में मदद कर सकता है। श्वेता, जो अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की न्यूट्रिशनिस्ट रह चुकी हैं, ने बताया कि विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अपने पैरों को गर्म पानी में भिगोने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि केवल 15 से 20 मिनट तक पैरों को गर्म पानी में भिगोने से स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है। गर्म पानी से सिकाई करने से रक्त वाहिकाएं फैलती हैं, रक्त संचार में सुधार होता है और शरीर को आराम मिलता है। यह तनाव को भी कम करता है। यदि इसमें एप्सम सॉल्ट मिलाया जाए, तो नींद में भी सुधार होता है। श्वेता ने इस विधि की प्रभावशीलता पर विश्वास व्यक्त किया है।
क्या इस दावे में सच्चाई है?
ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, मुंबई में न्यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. पंकज अग्रवाल ने कहा कि गर्म पानी में पैर भिगोने से अस्थायी आराम मिल सकता है, लेकिन इससे स्ट्रोक को रोकने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने के कारण होती है। इसका संबंध उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और खराब जीवनशैली से होता है। इन जोखिमों को नियमित जांच, स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं से नियंत्रित करना ही स्ट्रोक के खतरे को कम करने का वैज्ञानिक तरीका है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि गर्म पानी में पैर भिगोने से कुछ लोगों में रक्त संचार में सुधार हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव अस्थायी और सीमित होता है। यह शरीर की गहरी धमनियों या मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को प्रभावित नहीं करता, जहां स्ट्रोक की रोकथाम वास्तव में महत्वपूर्ण होती है।
पारंपरिक चिकित्सा में क्या माना जाता है?
जुपिटर हॉस्पिटल, ठाणे में आंतरिक चिकित्सा के निदेशक डॉ. अमित सराफ ने कहा कि गर्म पानी की थेरेपी की जड़ें पारंपरिक जापानी और चीनी चिकित्सा पद्धतियों में हैं। इसे शरीर की ऊर्जा संतुलित करने और रक्त प्रवाह में सुधार करने वाला माना जाता है। यह प्रक्रिया शरीर को आराम देती है, जिससे तनाव हार्मोन कम हो सकते हैं और रक्तचाप में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, यह चिकित्सा और जीवनशैली में आवश्यक बदलावों का विकल्प नहीं हो सकती।
स्ट्रोक से बचाव के लिए SMART नियम अपनाएं
- S Stop Smoking: धूम्रपान को पूरी तरह से छोड़ें।
- M Meals that are healthy: स्वस्थ आहार लें और जंक फूड से बचें।
- A Active Lifestyle: सक्रिय जीवनशैली अपनाएं — चलना, दौड़ना आदि।
- R Regular Checkups: नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
- T Treatment Adherence: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सही तरीके से सेवन करें।
क्या मेडिकल कंडीशन वाले लोग यह तरीका अपना सकते हैं?
डॉ. सराफ के अनुसार, जिन लोगों को चिकित्सा समस्याएं हैं, वे इस विधि का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डायबिटीज या पेरिफेरल न्यूरोपैथी से पीड़ित लोगों को पानी का तापमान ध्यान से जांचना चाहिए। इसके अलावा, गंभीर वैरिकोज वेन्स या हृदय विफलता वाले लोगों को लंबे समय तक गर्म पानी में पैर नहीं भिगोने चाहिए।
