जयराम रमेश की अमेरिका-ईरान वार्ता पर मोदी सरकार की आलोचना

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान की संलिप्तता और भारत की कूटनीतिक विफलताओं पर सवाल उठाए। रमेश ने चार प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए भारत की विदेश नीति पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की। जानें उनके विचार और पश्चिम एशिया में शांति की आवश्यकता पर उनके विचार।
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जयराम रमेश की अमेरिका-ईरान वार्ता पर मोदी सरकार की आलोचना gyanhigyan

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता

शनिवार को इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक पोस्ट में केंद्र सरकार की स्थिति को संभालने के तरीके पर चिंता जताई और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के बावजूद मध्यस्थता की भूमिका पर सवाल उठाया। रमेश ने यह भी बताया कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए किए गए व्यापक राजनयिक प्रयासों के बावजूद केंद्र सरकार की विफलता को उजागर किया।


जयराम रमेश के सवाल

रमेश ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका-ईरान की बैठक इस्लामाबाद में शुरू हो रही है, और पूरी दुनिया, विशेषकर भारत, इस बात की उम्मीद कर रही है कि यह दोनों देशों के बीच स्थायी शांति प्रक्रिया की शुरुआत करेगा। हालांकि, उन्होंने विश्वगुरु की कूटनीति के सार और शैली पर गंभीर सवाल उठाए।


उन्होंने चार प्रमुख सवाल उठाए: 1. पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका के बावजूद, भारत ने उसे अलग-थलग करने में विफलता क्यों दिखाई? 2. भारत ने अमेरिका को पाकिस्तान को नई भूमिका देने की अनुमति कैसे दी, जबकि उसने एकतरफा व्यापार समझौते पर भी सहमति दी? 3. BRICS+ के अध्यक्ष के रूप में भारत ने शांति या मध्यस्थता की पहल क्यों नहीं की? 4. पिछले अठारह महीनों में चीन के प्रति भारत की नीति से क्या हासिल हुआ?


पश्चिम एशिया में शांति की आवश्यकता

रमेश ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में शांति को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने होरमुज स्ट्रेट की स्थिति को भी उस समय पर लौटाने की आवश्यकता बताई, जब अमेरिका-इज़रायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे।