जयराम रमेश का मोदी सरकार पर तीखा हमला: ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में विकास परियोजनाओं पर चिंता
कांग्रेस नेता का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में चल रही विकास परियोजनाओं को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि इस पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का आक्रामक निर्माण जलवायु जोखिम को बढ़ाएगा, जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएगा और स्थानीय समुदायों को हाशिए पर डाल देगा। रमेश ने एएनआई से बातचीत में कहा कि नाजुक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को मंजूरी देने का तर्क समझ से परे है, क्योंकि यह विकास पर्यावरण स्थिरता और लोगों के कल्याण की कीमत पर किया जा रहा है।
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मोदी सरकार इन परियोजनाओं को क्यों बढ़ावा दे रही है, जो प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा देती हैं और ऑक्सीजन की कमी का कारण बनती हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि यह स्थानीय समुदायों के लिए फायदेमंद नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर व्यापार करने में आसानी को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया और कहा कि यह सांस लेने और जीने की सहजता को नष्ट कर रहा है।
पर्यावरणीय आपदाओं की चिंता
रमेश ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा उत्पन्न पर्यावरणीय आपदाओं की कोई कमी नहीं है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा पर रोक लगाई है, जिसे उन्होंने मोदी सरकार की एक और आपदा बताया। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में एक और बड़ी पर्यावरणीय आपदा का निर्माण किया जा रहा है।
स्थानीय समुदायों की आवाज
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से वह पर्यावरण मंत्री को पत्र लिख रहे हैं और संसद में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। रमेश ने कहा कि वहां हवाई अड्डा, बंदरगाह और पर्यावरण पर्यटन केंद्र बनाने की योजना है, जिससे लाखों पेड़ काटे जाएंगे और जैव विविधता को भारी नुकसान होगा। स्थानीय आदिवासी समुदाय पहले ही कह चुका है कि वे इस परियोजना का विरोध करते हैं, फिर भी मोदी सरकार इसे आगे बढ़ा रही है।
नए हवाई अड्डे का निर्माण
रमेश की ये टिप्पणियाँ उस समय आई हैं जब सरकार ने ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में एक नए हवाई अड्डे के निर्माण का कार्य शुरू किया है। दस्तावेजों के अनुसार, यह कार्य आधिकारिक तौर पर 22 दिसंबर को आरंभ हुआ।
