जयपुर में बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का उत्सव धूमधाम से मनाया गया

जयपुर में बहाई समुदाय ने नौरूज़ का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया। इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। नौरूज़ का पर्व आध्यात्मिक नवीनीकरण और एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम में सामूहिक प्रार्थना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रेरणादायक संदेश शामिल थे। सभी ने मिलकर समाज के उत्थान और मानवता की सेवा का संकल्प लिया। यह उत्सव विविधता में एकता का उदाहरण पेश करता है।
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जयपुर में बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का उत्सव धूमधाम से मनाया गया

जयपुर में नौरूज़ का पर्व


राजस्थान की राजधानी जयपुर में बहाई समुदाय ने बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। यह कार्यक्रम 20 मार्च की शाम को जयपुर के बहाई हाउस में आयोजित हुआ, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों—बीलबवा, वाटिका, जगतपुरा और अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में बहाई अनुयायी, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। इस आयोजन में एकता, प्रेम, भाईचारे और मानवता की सेवा का संदेश प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।


नौरूज़ का महत्व

जयपुर में बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का उत्सव धूमधाम से मनाया गया


नौरूज़ का पर्व वसंत विषुव के साथ मनाया जाता है और इसे बहाई धर्म में नए वर्ष की शुरुआत और आध्यात्मिक नवीनीकरण का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना सभा से हुई, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने विश्व शांति, मानव कल्याण और आपसी सद्भाव के लिए प्रार्थना की। इसके बाद नौरूज़ की विशेष प्रार्थना का पाठ किया गया, जिसने पूरे वातावरण को पवित्र और भावपूर्ण बना दिया।


श्री अनुज अनन्त का संदेश

कार्यक्रम में बहाई आध्यात्मिक सभा के सचिव श्री अनुज अनन्त ने कहा, "नौरूज़ केवल नया साल नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का संदेश है। 19 दिनों के उपवास के बाद यह पर्व हमें आत्मसंयम, सेवा और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि पूरी मानव जाति एक ही परिवार है और हमें मिलकर विश्व में शांति और प्रेम स्थापित करना है।"


नौरूज़ का सांस्कृतिक महत्व

जयपुर में बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का उत्सव धूमधाम से मनाया गया


वक्ता रमन बैरवा ने नौरूज़ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पर्व न केवल बहाई धर्म में, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों में नए आरंभ, आशा और प्रकाश का प्रतीक है। उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और सेवा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा बच्चों और युवाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां थीं। बीलबवा, वाटिका और जगतपुरा से आई बालिकाओं ने मधुर गीतों और समूह प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। युवा गायक हेत्विक सिंह ने अपनी भावपूर्ण गायन प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे उपस्थित लोग तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन करते रहे।जयपुर में बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का उत्सव धूमधाम से मनाया गया


समापन और संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को "नौरूज़ मुबारक" कहकर शुभकामनाएं दीं और नए वर्ष में समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, महिला-पुरुष समानता और मानव सेवा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।


यह उत्सव बहाई धर्म के मूल सिद्धांतों—एकता, शांति, समानता, प्रेम और सेवा—का जीवंत उदाहरण बना। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि विविधता में ही सच्ची एकता है, जो एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकती है।