जयपुर में बच्चों का अपहरण: चूड़ी फैक्ट्री में बंधक बनाए गए 7 बच्चे

जयपुर में 7 बच्चों को चूड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में बंधक बनाकर काम कराया गया। ये बच्चे बिहार के निवासी हैं, जिन्हें एक व्यक्ति ने घूमने के बहाने राजस्थान लाया था। फैक्ट्री में उन्हें 15 से 18 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, और केवल एक बार खाना दिया जाता था। दिवाली की रात, बच्चों ने भागने का फैसला किया और कब्रिस्तान में छिप गए। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकाला और मामले की जांच शुरू की।
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जयपुर में बच्चों की दयनीय स्थिति

जयपुर में बच्चों का अपहरण: चूड़ी फैक्ट्री में बंधक बनाए गए 7 बच्चे


जयपुर से 7 बच्चों को मुक्त कराया गया है, जिनकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। इन बच्चों को प्रतिदिन 15 से 18 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, और उन्हें केवल एक बार खाना दिया जाता था। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी।


जयपुर: कल्पना कीजिए, यदि आप एक कब्रिस्तान में 7 बच्चों को देखें, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? ऐसा ही दृश्य जयपुर में देखने को मिला, जहां 7 बच्चे भयभीत अवस्था में पाए गए। सवाल यह उठता है कि ये बच्चे इस स्थिति में कैसे पहुंचे और उनके साथ क्या हुआ।


ये सभी बच्चे बिहार के निवासी हैं। लगभग दो महीने पहले, शमशाद मियां नामक व्यक्ति ने उन्हें घूमने के बहाने राजस्थान लाया। बच्चों ने सोचा कि वे कुछ दिन आनंद लेंगे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी जिंदगी अंधकार में बदलने वाली है। जयपुर पहुंचते ही, उन्हें एक चूड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में डाल दिया गया। वहां की स्थिति बेहद खराब थी। बच्चों को प्रतिदिन 15 से 18 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। कांच की बारीक चूड़ियों को बनाते समय उनके हाथ घायल हो जाते थे, लेकिन मालिकों को इसकी कोई परवाह नहीं थी। खाने के नाम पर उन्हें दिन में केवल एक बार भोजन दिया जाता था। यदि कोई बीमार पड़ जाता या काम करने से मना करता, तो उसे डंडे से पीटा जाता।


कब्रिस्तान में रात बिताई
धीरे-धीरे बच्चों के दिलों में डर और निराशा घर करने लगी। दिवाली की रात, जब पूरा देश रोशनी में डूबा था, इन बच्चों ने तय किया कि अब और नहीं, और वे चुपचाप फैक्ट्री से भाग निकले। अंधेरी गलियों में भटकते हुए, वे भट्टा बस्ती के एक कब्रिस्तान पहुंचे और वहां पूरी रात डर के साए में बिताई। सुबह जब स्थानीय लोगों ने इन बच्चों को देखा, तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। रेस्क्यू टीम ने पहुंचकर सभी बच्चों को सुरक्षित निकाला। शुरुआत में बच्चे इतने डरे हुए थे कि कुछ बोल नहीं पाए, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पूरी कहानी पुलिस को बताई।


बाल श्रम की समस्या
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शमशाद मियां को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि जयपुर की कई चूड़ी फैक्ट्रियों में बच्चों से काम लिया जाता है। बताया गया कि बच्चों के हाथ छोटे और नाजुक होते हैं, जिससे कांच टूटने का खतरा कम रहता है, और उन्हें बहुत कम मजदूरी पर काम पर रखा जा सकता है।


जयपुर में चूड़ी बनाने वाली फैक्ट्रियों में बच्चों का उपयोग दशकों से हो रहा है। बाल श्रम कानून और प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बावजूद यह समस्या खत्म नहीं हो रही है। पुलिस के अनुसार, बच्चों का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि उनके हाथ छोटे और नाजुक होते हैं, जिससे कांच के साथ काम करने में नुकसान कम होता है। फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है।