जम्मू-कश्मीर में विशेष पुलिस अधिकारी की हत्या: चचेरे भाई और बेटे पर आरोप

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक विशेष पुलिस अधिकारी की हत्या का मामला सामने आया है। 55 वर्षीय बशीर अहमद की हत्या उनके चचेरे भाई और बेटे द्वारा जमीन विवाद के चलते की गई। आरोप है कि उन्हें लोहे की रॉड से मारा गया और फिर जिंदा गड्ढे में दफना दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना पूरे इलाके में हड़कंप मचा रही है और पारिवारिक विवाद के चलते हुई इस निर्मम हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जम्मू में हत्या की घटना


जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक 55 वर्षीय विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि उनके चचेरे भाई और उसके बेटे ने जमीन के पुराने विवाद के चलते उन्हें बेरहमी से मार डाला। बताया गया है कि पहले उन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, फिर उनके मुंह में पत्थर और मिट्टी भरकर उन्हें जिंदा गड्ढे में दफना दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या का कारण जमीन से जुड़ा पारिवारिक विवाद था, जिसे पहले ही सुलझा लिया गया था।


मृतक की पहचान बशीर अहमद के रूप में हुई है, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस में विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। वह किश्तवाड़ जिले के त्रिगाम गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे। 14 अक्टूबर की शाम को बशीर ने अपनी सर्विस राइफल लेकर ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। उनकी तैनाती घर से लगभग 800 मीटर दूर जंगल में थी। उन्हें रातभर ड्यूटी करनी थी और सामान्यतः वह सुबह छह से साढ़े छह बजे के बीच घर लौटते थे। लेकिन 15 अक्टूबर की सुबह जब वह घर नहीं लौटे, तो परिवार की चिंता बढ़ गई।


बशीर की पत्नी परवीना और 15 वर्षीय बेटी दिलशादा सुबह से उनके लौटने का इंतजार कर रही थीं। जब सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक उनका कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने उनके चचेरे भाई गुलाम रसूल से संपर्क किया। परिवार ने बशीर की ड्यूटी स्थल पर जाकर जानकारी ली, जहां पुलिसकर्मियों ने बताया कि वह सुबह साढ़े छह बजे अपनी ड्यूटी खत्म करके घर के लिए निकल चुके थे।


परिवार ने पहले आसपास के जंगलों में उनकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने किश्तवाड़ पुलिस थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत तलाशी अभियान शुरू किया। प्रारंभिक जांच में यह मामला आतंकवादियों द्वारा अपहरण का लग रहा था, क्योंकि बशीर अपनी सर्विस राइफल के साथ लापता हुए थे।


मोबाइल फोन से मिली जानकारी


किश्तवाड़ पुलिस के प्रभारी फिरदौस अहमद ने बताया कि 15 अक्टूबर की रात तक बशीर का कोई सुराग नहीं मिला। परिवार ने पुलिस को बताया कि उनका मोबाइल फोन भी गायब है। इसके बाद पुलिस ने फोन को ट्रैक किया और पता चला कि फोन को कुछ समय के अंतराल पर चालू और बंद किया जा रहा था। इस जानकारी ने पुलिस को मामले की दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया।


पुलिस को संदेह हुआ कि यदि आतंकवादियों ने बशीर का अपहरण किया होता, तो वे फोन अपने साथ नहीं रखते। मोबाइल फोन की गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने हत्या की संभावना पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद अधिकारियों ने बशीर के घर से ड्यूटी स्थल के बीच के रास्ते की फिर से तलाशी लेने का निर्णय लिया।


16 अक्टूबर को तलाशी के दौरान पुलिस को बशीर का मोबाइल फोन झाड़ियों में मिला। इसके बाद उनकी सर्विस राइफल भी एक नाले के पास बरामद हुई। इन दोनों चीजों के मिलने से पुलिस का शक और गहरा गया। घटनास्थल के आसपास जांच करने पर पुलिस को ताजा खोदी गई मिट्टी मिली, जिसके नीचे बशीर का शव दबा हुआ था।


हत्या की भयावहता


शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बशीर का अपने चचेरे भाई बशीर अहमद डार के साथ जमीन को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्यों के हस्तक्षेप से यह विवाद सुलझ गया था। पुलिस ने बशीर अहमद डार और उसके बेटे नजीर अहमद डार को पूछताछ के लिए बुलाया।


शुरुआत में दोनों ने बशीर को देखने से इनकार किया, लेकिन जब पुलिस ने उनके मोबाइल फोन की लोकेशन का मिलान किया, तो पता चला कि दोनों के फोन उसी स्थान के आसपास सक्रिय थे, जहां से बशीर लापता हुए थे। इस साक्ष्य के बाद दोनों के बयान बदल गए और उन्होंने वारदात से जुड़ी जानकारी दी।


पुलिस के अनुसार, पूछताछ में जमीन विवाद की पुरानी कहानी सामने आई। आरोपियों ने बताया कि बशीर के पिता ने जमीन बेची थी, लेकिन बशीर ने इसे मानने से इनकार कर दिया। विवाद बढ़ने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने हस्तक्षेप किया और जमीन बशीर को वापस कर दी गई थी।


जंगल में हमला


पुलिस की जांच में सामने आया कि 15 अक्टूबर को जब बशीर अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे थे, तब उनकी मुलाकात बशीर अहमद डार और नजीर अहमद डार से हुई। आरोप है कि बशीर अहमद डार ने उनसे बहस शुरू की, जिसके बाद नजीर ने उनके सिर पर लोहे की रॉड से वार किया।


बशीर घायल होकर गिर पड़े और आरोपियों ने उनके मुंह में पत्थर और मिट्टी भर दी ताकि वह शोर न मचा सकें। इसके बाद उन्हें गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक दिया गया।


जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बशीर की मौत सिर पर चोट के कारण नहीं हुई, बल्कि उन्हें जिंदा दफनाया गया था। यह तथ्य पुलिसकर्मियों को भी स्तब्ध कर गया।


परिवार का सदमा


बशीर की हत्या की खबर से उनका परिवार गहरे सदमे में है। पत्नी और बेटी के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जिस व्यक्ति का वे सुबह से इंतजार कर रहे थे, उसकी इतनी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। परिवार के करीबी रिश्तेदार ने कहा कि विवाद सुलझ चुका था और किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतनी दर्दनाक घटना में बदल जाएगा।


पुलिस ने बशीर अहमद डार और नजीर अहमद डार को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है। यह घटना पूरे इलाके को झकझोर देने वाली है और पारिवारिक विवाद के चलते हुई इस हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।